डॉ. आंबेडकर के आर्थिक चिंतन को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत किया- प्रो. धीरेश कुलश्रेष्ठ

अटल सभागार में एक भव्य राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन 

 मेरठ।चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद, मान्यवर कांशीराम शोध पीठ एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रावास के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर अटल सभागार में एक भव्य राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था“डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार और 21वीं सदी का भारत: समावेशी लोकतंत्र, शिक्षा एवं विकास की दिशा”।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य प्रो. हरे कृणा ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का चिंतन भारतीय समाज को समता, न्याय और बौद्धिक जागरूकता की दिशा में सतत प्रेरित करता है तथा आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्री अरुण कुमार चौधरी (वैज्ञानिक एवं उप निदेशक, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नई दिल्ली) ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. अंबेडकर का दृष्टिकोण सामाजिक न्याय के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच, नवाचार और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। बीज वक्ता के रूप में प्रो. धीरेश कुलश्रेष्ठ (चितकारा विश्वविद्यालय, पंजाब) ने डॉ. अंबेडकर के आर्थिक चिंतन को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत किया, जबकि गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीप दहिया ने उनके दर्शन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर प्रो. निवेदिता कुमारी (प्राचार्य, रघुनाथ गर्ल्स डिग्री कॉलेज, मेरठ) ने महिला सशक्तिकरण को डॉ. अंबेडकर के विचारों का आधार बताया। प्रो. राजीव कौशिक (श्री कुंद-कुंद जैन, खतौली) ने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए डॉ अम्बेडकर के विचारों को वर्तमान वैश्विक परिद्रश्य में आवश्यक बताते हुए मार्गदर्शक बताया l 

विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. जमाल अहमद सिद्धिकी ने ज्ञान और शोध संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया, जबकि प्रमुख समाजसेवी प्रो. सतीश प्रकाश ने सामाजिक न्याय और समान अवसरों पर अपने विचार रखे। साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रो. नीलू जैन गुप्ता ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है, वहीं समन्वयक प्रो. के. के. शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समन्वयक एवं मान्यवर कांशीराम शोध पीठ के निदेशक प्रो. दिनेश कुमार ने डॉ. अंबेडकर को “वैश्विक रत्न” बताते हुए उनके चिंतन, दर्शन एवं सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा की डॉ अम्बेडकर जी के विचार ही वर्तमान वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कसर सकते है l इस अवसर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रावास के अधीक्षक डॉ. वाई. पी. सिंह एवं सहायक अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए और छात्रों को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया ।

कार्यक्रम में प्रो शैलेन्द्र गौरव ने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण एवं समावेशी समाज के निर्माण पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अजय कुमार, डॉ. मुनेश कुमार, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. नेहा गर्ग एवं डॉ. विजय कुमार राम, डॉ मनोज जातव , डॉ जसवीर सिंह , डॉ अमन , डॉ अमरीश कुमार , डॉ ममता सिंह एवं डॉ कविता गर्ग का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रावास के छात्रों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली रहा। कार्यक्रम में सम्मिलित सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ तथा उपस्थित सभी शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बाबा साहब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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