राजीव त्यागी
डिजिटल दुनिया में बढ़ी अनिद्रा
इन दिनों देश में किशोरों का स्क्रीन टाइम घातक ढंग से बढ़ रहा है। आमतौर पर चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि किशोरों की सेहत के लिये आठ घंटे की नींद जरूरी होती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ आठ घंटे के बजाय सात-छह घंटे की नींद को भी पर्याप्त मानते हैं, बशर्ते उसमें बीच में किसी तरह का व्यवधान न हो। लेकिन बिना किसी जरूरी काम के कथित सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना आज के दौर में फैशन सा बन गया है।
हालिया शोध बताते हैं कि रात में जल्दी सोने व सुबह जल्दी उठने से बेहतर स्वास्थ्य बनता है। यह भारतीय जीवन दर्शन की अपरिहार्य धारणा भी रही है। लेकिन देश में पहले टीवी और अब मोबाइल फोन के अनियंत्रित उपयोग ने युवाओं की रात की नींद उड़ा दी है। जिसके चलते युवा पूरे दिन उखड़े-उखड़े और अशांत रहते हैं। उनमें आक्रामकता बढ़ रही है। फिर वे अवसाद के शिकार हो जाते हैं। बाधित नींद की इस स्थिति में कालांतर मन में आत्महत्या जैसे नकारात्मक भाव उमड़ने लगते हैं। दरअसल, आज छात्रों पर अभिभावकों व शिक्षकों का अनुशासन कम ही चलता है।
मां-बाप के टोकने पर वे दलील देते हैं कि ऑन लाइन पढ़ाई चल रही है। कोरोना संकट ने देश-दुनिया में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प तो दिया, लेकिन तमाम तरह की विसंगतियां व विकृतियां भी किशोरों के जीवन में भर दी हैं। वे देर रात तक ऑनलाइन गेमों से जुड़े रहते हैं। रात में जाने-अनजाने दोस्त उनके सहभागी बनते हैं। जो कालांतर एक नशे की लत का रूप ले लेता है। परिजनों की रोक-टोक उन्हें रास नहीं आती। कई घटनाओं में उनके आक्रामक व्यवहार के घातक परिणाम सामने आए हैं। यहां तक कि नजदीकी परिजनों की हत्या की घटनाएं भी हुई हैं। आज का युवा देर रात तक ऑनलाइन रहने में अपनी शान समझते हैं।
यह भूल जाते हैं कि वास्तव में, वे अपनी सेहत से किस हद तक खिलवाड़ कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी देते रहे हैं अनिद्रा से उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा हो रही है। जो कालांतर हाइपरटेंशन में बदल जाती है। देर रात जागने और मोबाइल के नशे में किशोर असमय खाते-पीते हैं, जिससे उनमें मोटापे की समस्या भी घर कर रही है।
यही वजह है कि अब किशोरों तक में डायबिटीज की समस्या देखने में आ रही है। दरअसल, कुदरती सोने के समय का विकल्प देर रात या सुबह की नींद नहीं हो सकती है। यह संकट बड़ा है और अभिभावकों व शिक्षकों को किशोरों की देर रात जागने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिये गंभीर प्रयास करने होंगे।




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