दादा चौधरी चरण सिंह, पिता अजित की राह पर जयंत सिंह
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण-मुसलमान वोट बैंक पर नजर
मेरठ। यूपी राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ पता नहीं रहता है। इन दिनों सभी दल 2027 चुनाव की फील्डिंग सेट करने में जुटे हुए हैं। रालोद वेस्ट यूपी में अभी से अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई है।रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह भी भाईचारे के नारे को बुलंद कर रहे हैं। इस नारे के पीछे उनकी नजर ब्राह्मण-त्यागी और मुसलमान को साधना माना जा रहा है। खासकर वेस्ट यूपी में भाजपा से गठबंधन के चलते मुसलमानों के दूरी बनाने का खतरा सियासी हलकों में जताया जा रहा है। वहीं, त्यागी समाज यहां काफी वक्त से वेस्ट यूपी में बीजेपी से थोड़ा नाखुशी रहा है।
वेस्ट यूपी के दौरे पर निकले रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह ने शनिवार को मेरठ जिले के ईकड़ी गांव (बागपत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा) में बड़ी जनसभा की थी। जयंत ने तमाम सियासी बातें यहां की, लेकिन उनका दादा और पिता के भाईचारा के नारे पर कायम रहने के ऐलान को सियासी हलकों में खास मायने निकाले जा रहे हैं। 2013 के मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद मुसलमान और जाट समाज के बीच आई दरार को पाटने को लिए चौधरी अजित सिंह ने भाईचारा बढ़ाओ अभियान चलाया था। उसमें सौहार्द का तानाबाना फिर से बना था।
मुस्लिमों को साधने में जुटे रालोद
फिलहाल रालोद ने भाजपा से गठबंधन हैं। राजनीतिक के जानकारों की माने तो गठबंधन के बाद सियासी हलकों में इस बात को महसूस किया जा रहा है कि रालोद की वेस्ट में ताकत रहे मुसलमान खुद को असहज महसूस करने लगे हैं। 2027 के चुनाव में इसका नुकसान रालोद को हो सकता है, क्योंकि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति पर जोर रहता है। ऐसे में ईकड़ी की रैली में जयंत ने अपने पिता चौधरी अजित सिंह और दादा चौधरी चरण सिंह के भाईचारा कायम करने के एजेंडे पर अडिग रहने का ऐलान किया। माना जा रहा है कि जयंत का यह ऐलान मुसलमानों को साधने के लिए रहा। हालांकि, मुस्लिम उनके इस बयान को कितना पसंद करते हैं, यह 2027 का चुनाव तय करेगा।
ब्राह्मण-त्यागी को जोड़ने और साधने में मुहिम
इसी के साथ चौधरी जयंत सिंह ने अपने रैली और अन्य कार्यक्रम में वेस्ट यूपी में ब्राह्मण-त्यागी को जोड़ने और साधने में मुहिम चलाई हुई है। सियासी पंडितों का मानना है कि 2022 के चुनाव की तरह अगर मुस्लिम थोड़ा हटता भी है, तब भी ब्राह्मण-त्यागी को साथ लेकर सियासी नुकसान की भरपाई की जा सकती है। सियासी जानकारों के मुताबिक, इस समाज को साधने के लिए जयंत सिंह ने पहले मेरठ जिले का जिलाध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज को बनाया। उसी के गांव ईकड़ी में बड़ी रैली की। अनिकेत के सहारे ब्राह्मण-त्यागी को सम्मान देने की संदेश दिया। उसके गांव में रैली कर समाज और अध्यक्ष को तवज्जो देने का काम किया।
अनिकेत के सहारे बाह्मण-त्यागी को साधने में जुटे जयंत
रैली में ब्राह्मण त्यागी समाज की बड़ी तादाद को देखकर जयंत ने सियासी दांव भी खेला। पहले बताया कि 28 साल के युवा अनिकेत पर मैंने भरोसा किया। जिलाध्यक्ष बनाया। कहा कि ये रालोद का पुराना जुड़ाव दिखाता है। संकेत दिए कि अनिकेत सियासत में अभी बहुत आगे जाएगा। उससे गलती हो तो माफ कर देना। इसी के साथ ब्राह्मण-त्यागी से रालोद के जुड़ाव को बताकर याद दिलाया कि माया त्यागी कांड हुआ था।
चौधरी जयंत सिंह की नजरें 2027 चुनाव पर
जयंत सिंह ने ब्राह्मण-त्यागी समाज से दादा और पिता का जुड़ाव याद दिलाया और कहा कि मेरठ के रासना के रहने वाले बुजुर्ग ओमप्रकाश त्यागी मेरे से मिले। उन्होंने चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह के साथ अपने फोटो दिखाए थे। ये इस समाज का हमारे परिवार से गहरा नाता होने का सबूत है। जयंत ने रासना में एक स्टेडियम बनवाने का ऐलान कर त्यागी समाज से और जुड़ाव दिखाया है। कुल मिलकार जयंत की नजर 2027 पर है।

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