अपने ही हाथों से तोड़ रहे सपने शास्त्री नगर के व्यापारी
'खून-पसीने से सींची दुकानें,अब खुद चला रहे हथौड़ा
मेरठ। सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों का 40 साल पहले तखत और फोल्डिंग पलंग से सफर शुरू हुआ था। संघर्ष से बाजार को बसाया था। अब व्यापारी खुद के ही निर्माण उजाड़ने को मजबूर हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि दुकानें खून-पसीने से सींची थीं, आज खुद हथौड़ा चलाना पड़ रहा है।
करीब 35-40 साल पहले जब शास्त्रीनगर एक तरह से जंगल था और शाम होते ही लोग इधर आने से कतराते थे तब इन व्यापारियों ने तखत और फोल्डिंग पलंग पर फड़ लगाकर काम शुरू किया था। पाई-पाई जोड़कर उन्होंने अल्प आय वर्ग (एलआईजी) ओर ई डब्ल्यू एस के भवन लिए और जीवनयापन के लिए उनमें छोटी-छोटी दुकानें खोलीं।
इंसान अपनी पूरी उम्र एक-एक ईंट जोड़कर अपने सपनों का आशियाना और कारोबार खड़ा करता है लेकिन हमने जिन दुकानों को अपने खून-पसीने से सींचा था आज हाथों में हथौड़ा थामकर उन्हें जमींदोज करना पड़ रहा है। अपने ही सपनों को अपने ही हाथों से तोड़ना विभीषिका से कम नहीं है। यह कहना है मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का। इन दिनों बाजार की गलियों में हथौड़ों की चोट की आवाज गूंज रही है इस चोट से ईंट-पत्थरों की इमारतों के साथ व्यापारियों के दिल और उम्मीदें भी टूट रही हैं।
आवास एवं विकास परिषद की ओर से शास्त्रीनगर स्कीम नंबर सात की 859 संपत्तियों की सूची सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। स्कीम के तहत ये संपत्तियां आवासीय हैं लेकिन इनका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास ने 44 भवनों को सील कर दिया था। वहीं बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में हुए निर्माण को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया था।ऐसे में अब व्यापारियों ने भारी मन से खुद ही ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया है। अलंकार साड़ी के संचालक राजीव गुप्ता ने बताया इस बाजार की नींव मेहनत और संघर्ष पर टिकी है। यहां बड़ी संख्या में पंजाबी समाज के दुकानदार हैं, जिनमें कई ऐसे परिवार भी हैं जो विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर यहां बसे थे।
व्यापारियों का कहना है कि उनकी मेहनत और मशक्कत ने ही इस सुनसान इलाके को बाजार की पहचान दिलाई जिससे शास्त्रीनगर आज शहर के पॉश इलाकों में गिना जाता है। अपने उस संघर्ष को याद कर दुकानदारों की आंखों से आंसू बह निकलते हैं। वे मौजूदा हालात के लिए सीधे तौर पर आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि अधिकारियों की मिलीभगत और शह के बिना आवासीय क्षेत्र कभी बाजार में तब्दील नहीं हो सकता था।
दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस कारोबार को खड़ा करने में पूरी उम्र गुजार दी, उसे इस तरह नेस्तनाबूत होते देखना पड़ेगा। वर्षों की मेहनत से तैयार की गई दुकानों को अब खुद ही श्रमिकों से तुड़वाना पड़ रहा है। अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए व्यापारी अब सिर्फ अपने उजड़ते आशियानों और रोजगार को बेबसी से देख रहे हैं।
16-17 को आवास विकास पर हल्ला बोलेंगे व्यापारी
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में 661/6 की 22 दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद 44 भूखंड सील कर दिए गए। आवास विकास अब सेक्टर 2 पर कार्रवाई की तैयारी में है। इसके खिलाफ व्यापारियों ने अधिकारियों को घेरने का एलान कर दिया है कोर्ट के आदेश पर शास्त्रीनगर के 44 भूखंडों में बनी 350 दुकानों को सील किए जाने के बाद व्यापारियों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने दो टूक कहा कि यदि अवैध निर्माण के नाम पर दुकानें सील हुई हैं तो आवास विकास के उन अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में ये निर्माण हुए। उन्होंने कहा कि 661/6 की 22 दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद अब 44 भूखंड के अलावा सेक्टर 2 पर कार्रवाई की तैयारी है। इसके विरोध में संगठन 16-17 अप्रैल को आवास विकास कार्यालय में बड़ा हल्ला बोल प्रदर्शन करेगा।


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