अनाेखा तताक जब बेटी के तलाक पर रिटायर्ड जज पिता ने ढोल-नगाड़े बजवाए
परिवार ने जमकर डांस किया; 8 साल पहले मेजर से हुई थी शादी
मेरठ। शनिवार को तलाक का एक अनोखा मामला सामने आया। यहां एक परिवार ने तलाक के बाद बेटी का फूल मालाओं से स्वागत किया। ढोल की थाप पर लोग कोर्ट से घर तक नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटी गईं।रिटायर्ड जज पिता ने फूल-माला पहनाकर घर में बेटी का स्वागत किया। इस मौके पर परिवार के सभी सदस्य ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहने दिखे। जिस पर बेटी की तस्वीर थी और लिखा था- "आई लव माय डॉटर"।
पिता ने कहा, मैंने 8 साल पहले अपनी इकलौती बेटी की शादी आर्मी के मेजर के साथ की थी। लेकिन मेरी बेटी ससुराल में खुश नहीं थी। उसे परेशान किया जाता था।उन्होंने भावुक होकर कहा-अगर मेरी बेटी शादी के बाद खुश नहीं थी, तो उसे खुश रखना मेरा फर्ज है। मैंने कोई एलीमनी या सामान नहीं लिया। सिर्फ अपनी बेटी को वापस घर लाया हूं।
रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया- मेरी बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के आर्मी के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष का व्यवहार ठीक नहीं रहा। पिछले 7 सालों में बेटी को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ीं।
पति और परिवार के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। इस दौरान उसका एक बेटा भी हुआ। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले। ससुराल पक्ष की ओर से उसे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से परेशान किया जाता रहा। बेटी को उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।आखिरकार प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला किया। उसने मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल की। 4 अप्रैल को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। इसके बाद परिवार बेटी प्रणिता शर्मा को पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया है।
पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए- प्रणिता शर्मा
प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। उनके भाई की साल 2022 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। प्रणिता ने बताया कि वह मानसिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी थीं। लेकिन परिवार हर समय उनके साथ खड़ा रहा। इसी सहारे उन्होंने खुद को संभाला।
उन्होंने अन्य महिलाओं को संदेश दिया कि अगर आप किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें। अपने लिए खड़े हों। पहले खुद को मजबूत बनाएं। पढ़ें-लिखें। अपने पैरों पर खड़ी हों। उसके बाद ही शादी के बारे में सोचें।
उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही असली सशक्तिकरण है।
पिता बोले- मेरी बेटी है, कोई सामान नहीं
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि अगर मेरी बेटी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी। आज मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लेकर आया हूं। मैंने उन लोगों से कोई एलीमनी या सामान नहीं लिया है।
उन्होंने समाज को संदेश दिया कि बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का बराबर सदस्य मानना चाहिए। समाज में अब भी यह सोच है कि बेटी की डोली जाती है, तो अर्थी ही लौटनी चाहिए। इस सोच में थोड़ा बदलाव आया है, लेकिन असली बदलाव अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है। बेटी कोई सामान नहीं, वह परिवार का हिस्सा है। महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे जमीन पर उतारना जरूरी है।
मेजर गौरव अग्निहोत्री जालंधर में तैनात
मेजर गौरव अग्निहोत्री शाहजहांपुर जिले के कोना याकूबपुर में हुई थी। गौरव इस समय जालंधर में पोस्टेड हैं। उनके पिता श्याम किशोर अग्निहोत्री रिटायर्ड मेजर सूबेदार हैं।


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