आयरन डिफिशिएंसी की सही समय पर जांच कराके इलाज करें

  मेरठ । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं में आयरन की कमी तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में अनैमिया की दर फ़िफ़्टी, 7% और पुरुषों में 25% है। ऐसे में यदि आप बिना वजह थकान महसूस कर रही हैं, आपको चक्कर आते हैं या चेहरे की चमक फीकी पड़ रही है तो यह आयरन डिफिशिएंसी के लक्षण हो सकते हैं। मेडिकल कॉलेज के ऑफिसर  डॉ दिव्यांशु सेंगर  ने बताया कि 15 से 49 वर्ष की 68.4 पृथसत भारतीय महिलाएँ इनामिक हैं।यह आंकड़ा आधे से अधिक होने के कारण भारत में स्थिति ज्यादा गंभीर है।1.92 अरब लोग आयरन की कमी और एनीमिया से प्रभावित हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है 30 से 33 प्रतिशत महिलाएं दुनियाभर में प्रजनन आयु 15 से 49  वर्ष में एनीमिया से ग्रस्त हैं

 क्यों जरूरी है आयरन शरीर के लिए

 आयरन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है जो हिमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है।हिमोग्लोबिन खून के जरिए ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है।आयरन मस्तिष्क के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर की कार्यक्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण है।आयरन डिफिशिएंसी की वजह से ये सभी कार्य प्रभावित होते हैं

आखिर क्यों होती है आयरन की कमी शरीर में

 आयरन की कमी आज आम समस्या बन गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है संतुलित और पौष्टिक आहार की कमी और उसका 7 न करना, खासकर महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव से आयरन की कमी हो जाती है। इसके अलावा, महिलाओं को गर्भावस्था में शरीर को अतिरिक्त आयन की आवश्यकता होती है, वहीं पाचन संबंधी समस्याएं भी आयरन के सही अवशोषण में बाधा डालती है।ऐसे में आपके लिए आयरन से भरपूर पौष्टिक आहार और सही देखभाल बहुत जरूरी है

आयरन डिफिशिएंसी के क्या होते हैं लक्षण

 शरीर में आरण डिफिशिएंसी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं जो थकान, कमजोरी, चक्कराना और सांस फूलने जैसी परेशानियों के साथ दिखते हैं। साथ ही इसकी कमी से त्वचा पीली पड़ सकती है और बाल झड़ने की समस्या भी दिखाई देती है। कई मामलों में, सिरदर्द, दिल की धड़कन, तेज होना और हाथ पैर ठंडे रहने जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं

 खान पान में बदलाव कर आयरन डिफिशिएंसी से बच सकते हैं

 डॉ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि आयरन की कमी को रोकने के लिए अपने खानपान में बदलाव करना बेहद असरदार होता है। आप अपने आहार में हरी पत्तियाँ, सब्जियां, पालक, अनार, किशमिश, गुड़, चुकंदर दालें और सूखे मेवे शामिल कर सकते हैं। विटामिन सी से भरपूर संतरा, नींबू और आंवला आयरन के अवशोषण को बढ़ाते हैं, इसलिए अपने खानपान में इनको भी शामिल कर सकते हैं। वहीं नॉनवेज खाने वाले अंडा, मछली और मांस को भी अपने आहार में जोड़ सकती है। नियमित एवं संतुलित आहार से आयरन की पूर्ति हो जाती है और आप आयरन की डिफिशिएंसी से अपने शरीर को बचा सकती हैं।



 समय पर पहचान कर कराएं इलाज

 डॉ॰ दिव्यांश सेंगर ने बताया कि अगर सही समय पर आयरन डिफिशिएंसी की पहचान कर ली जाए तो शरीर स्वस्थ बना रहता है। अगर किसी को लगता है कि आप आयरन डिफिशिएंसी से जूझ रहे हैं तो समय पर जांच कराना बेहद जरूरी होता है। ब्लड टेस्ट के जरिए हिमोग्लोबिन का स्तर आसानी से पता लगाया जा सकता है। चिकित्सक की सलाह से आयरन सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना नुकसानदायक भी हो सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से इसे पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है

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