एनजीटी के आदेश पर सौ साल पुराने टेंडरी चर्म शोधन कारखाने पर लगी सील
डूंगर् गांव में प्रदूषण फैलाने पर प्रशासन की कार्रवाई,मजदूरों पर छाया रोजगार का संकट
मेरठ। रोहटा में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर रोहटा के डूंगर् गांव में स्थित एक 100 साल पुराने टेंडरी चर्म शोधन कारखाने को सील कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कारखाने के बंद होने से सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
यह कारखाना पिछले सौ वर्षों से लगभग 150 परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य स्रोत था, जहाँ चमड़ा रंगने का कार्य होता था। वर्ष 2004 में केंद्र और राज्य सरकारों ने इसके उच्चीकरण के लिए 4 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। उस समय एक समूह बनाकर काम शुरू किया गया था और एक समिति भी गठित की गई थी।ग्रामीणों ने कुछ वर्षों तक समूह और समिति का नवीनीकरण कराया, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया बंद हो गई। इसके बाद, कारखाना कई वर्षों से बिना अनुमति के अवैध रूप से चमड़ा रंगने का काम कर रहा था।
कारखाने से निकलने वाले प्रदूषित पानी से आसपास के खेतों की फसलें बर्बाद हो रही थीं। यह दूषित पानी एक नाले के माध्यम से पड़ोसी गांवों पुठ खास और आजमपुर में छोड़ा जा रहा था। जांच में इन दोनों गांवों का पानी भी प्रदूषित पाया गया। इन गांवों में कैंसर और दमा जैसे मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही थी।इन गंभीर समस्याओं को देखते हुए पुठ खास गांव निवासी सूरज बली सैनी ने सबसे पहले प्रदूषण विभाग में शिकायत दर्ज कराई।
विभाग की जांच में कारखाने से निकलने वाला पानी प्रदूषित पाया गया। प्रदूषण विभाग ने जनहित में कारखाने को बंद करने के लिए जिलाधिकारी, मेरठ से अनुरोध किया था।प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर, शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को लेकर एनजीटी में एक जनहित याचिका दायर की और कई वर्षों तक इसकी पैरवी की। एनजीटी की टीम ने भी कई बार गांव का दौरा किया, पानी के नमूने लिए और जांच में उन्हें प्रदूषित पाया। विस्तृत सुनवाई के बाद, एनजीटी ने अंततः कारखाने को सील करने का आदेश जारी किया।


No comments:
Post a Comment