मोदीपुरम के बाद पीलीभीत में बनेगा बासमती का पावर हब
70 साल के पट्टे पर बनेगा देश का पहला जैविक प्रशिक्षण केंद्र
मेरठ। पीलीभीत जनपद के टांडा बिजैसी क्षेत्र में बासमती चावल उत्पादन को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), कृषि विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 70 वर्ष के पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर कर बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
करीब सात एकड़ क्षेत्र में बनने वाला यह अत्याधुनिक केंद्र देश का पहला ऐसा संस्थान होगा, जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा। केंद्र में आधुनिक सभागार, बासमती व जैविक खेती पर संग्रहालय व गैलरी, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला और जैविक संसाधनों के भंडारण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पीलीभीत को देश के प्रमुख बासमती उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए किसानों से इसमें अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इस दौरान भारत की पहली एआई आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना (2026-2028) का भी अनावरण किया गया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी और 1.5 लाख से अधिक सर्वेक्षण बिंदुओं से डेटा एकत्र करते हुए पांच लाख से अधिक किसानों को जोड़ेगी। परियोजना का उद्देश्य सटीक फसल आकलन, उन्नत किस्मों की पहचान और निर्यात योजना को मजबूत करना है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के परीक्षणों के लिए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) केंद्र के रूप में भी मान्यता मिली है। इससे पीलीभीत, नगीना और मोदीपुरम के बाद उत्तर प्रदेश के बासमती जीआई क्षेत्र में तीसरा प्रमुख अनुसंधान केंद्र बन जाएगा, जिससे स्थानीय जलवायु के अनुरूप नई किस्मों के विकास को गति मिलेगी।
बता दे भारत के जीआई टैग प्राप्त बासमती चावल का निर्यात वर्ष 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि निर्यात मात्रा 65 लाख मीट्रिक टन रही। मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भारतीय बासमती की मजबूत मांग देश के कृषि निर्यात को नई दिशा दे रही है।

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