आपकी अपनी झालमुड़ी  

- ललिता जोशी
वैसे तो खाने के लिए हजारों खाद्यपदार्थ हैं । जिनसे कई प्रकार के व्यंजन बनते हैं । जिन्हें बड़े ही चाव से पकाया और खाया जाता है । वैसे तो अपने देश में खिचड़ी से लेकर 56 भोग का अपना ही जलवा है,अब इनमें पाश्चात्य व्यंजन भी शामिल हो गए है । इनका स्वाद युवाओं के सिर चढ़ कर बोलता है । भारतीय त्योहारों में दीपावली सबसे बड़ा त्योहार है । इस दीपावली में आपकी सबकी चहेती होती है सोनपापड़ी । दीपावली पर हर दिल अजीज सोनपापड़ी हर जगह अपनी उपस्थिति   दर्ज कराती है । बड़ी से बड़ी दुकान और गली नुकक्ड की दुकानों पर हम सब इसे हँसते और मुस्कुराते हुए देख सकते हैं । इस का जीवन भी लंबा होता है यानि टिकाऊ होती है । रसगुल्ले ,बर्फी,संदेश ,चमचम इत्यादि -इत्यादि की लाइफ कम होती है । सभी की अपनी पसंद होती है कि किसको क्या खाना है ,क्या नहीं खाना है । 

 कब कौन सा खाद्यान्न सुर्खियों में आ जाए । कुछ कहा नहीं जा सकता । श्रीअन्न भी लोकप्रिय हुआ था नेताओं के कारण । कभी ये उपेक्षित और दिन हीन था ।  अबकी बारी है झालमुड़ी । इसीलिए सभी के लबों पर नाम है झालमुड़ी का । बंगाल का सनेक है झालमुड़ी । साधारण से मुरमुरों और नमकीन से बनी ये झालमुड़ी आज पूरे देश को अपना जलवा दिखा रही है ।  जैसे की वो धुरंधर हो । भई चुनाव के मौसम में तूफानी और धुआंधार प्रचार में कौन से नेता का मन किस चीज पर आ जाये कहा नहीं जा सकता । यह मन की बात है ।

पश्चिम बंगाल के चुनावों में भाषण तो चर्चित हुए लेकिन बाजी मार ले गई झालमुड़ी। क्या इतिफाक है अपने प्रधानमंत्री महोदय अपने रोडशो के दौरान एक दुकान पर रुके और जा खड़े हुए झालमुड़ी की दुकान पर । बस फिर क्या था उन्होने बात की झालमुड़ी विक्रेता से बातचीत की उससे उसका नाम पूछा और उसके घर परिवार के बारे भी पूछा । झालमुड़ी बेचने वाला भी सुर्खियों में छा गया । क्या कहने विक्रम कुमार का उसने भी बड़े प्रेम से प्रधानमंत्री जी को झालमुड़ी बना कर दी और प्रधानमंत्री जी ने भी बड़े प्यार से उसे खाया और इसके बाद इस झालमुड़ी की कीमत भी अदा करी । एक उपभोक्ता की तरह उन्होने विक्रेता से माल खरीदा और गुणवत्ता और स्वच्छता संतोषजनक होने पर उसे खाया भी । उसकी तारीफ भी की । जो साफ-सफाई झालमुड़ी की दुकान पर दिखाई दी आमतौर वैसी दिखाई नहीं पड़ती। यही कारण रहा होगा जो प्रधानमंत्री जी ने इस दुकान पर झालमुड़ी को चुना। मगर फिर भी मिर्ची लग ही गई किसी को । इस देश में सभी को अपनी पसंद का भोजन खाने की आज़ादी सभी को । चाहे वो किसी भी पद पर हो।
ये सीन वायरल हुआ तो झालमुड़ी वाले भैया को भी प्रसिद्धि मिल गई । प्रधानमंत्री जी के इस वीडियो को लोगों ने एक ही दिन में 10 करोड़ से अधिक बार देखा । इस वीडियो ने सोशल मीडिया के सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले और धमाल कर डाला  । चुनाव के दौरान इतनी पब्लिसिटी क्या गुल खिलाएगी ये तो जनता ही अपने वोट से बताएगी । प्रधानमंत्री को प्रसिद्धि क्या ही प्रभावित करेगी लेकिन इस सबमें चमक गई झालमुड़ी । नमकीन मुरमुरों, नमकीन, सरसों का तेल, टमाटर, मिर्ची और तीखे मसालों से तैयार इस झालमुड़ी को वो परम पद मिल गया जो शबरी के बेरों को मिला था । उस समय तो उनका अपने आराध्य के साथ निस्वार्थ भक्त और भक्ति का रिश्ता था। लेकिन झालमुड़ी से ये रिश्ता खालिस तौर पर वोट और नेता का है।
झालमुड़ी भी राजनीति में रणनीति का हिस्सा बन गई । देखते हैं झालमुड़ी किसको सत्ता के गलियारे की ओर ले जाती है और किसको गलियारे से बाहर । अरे आपकी अपनी सीधी -सादी  मगर तीखी झालमुड़ी तो हल्का- फुल्का नाश्ता है मगर अब की बार ये हल्की-फुलकी किस पर भारी पड़ेगी । आखिर है तो आपकी अपनी ही । ऐसा लगा की मोदी जी का हाथ लगते ही ये साधारण से श्रेष्ठ बन गई। चुनाव के चमत्कार को नमस्कार । जय हो चुनाव और उसके नायकों और भक्तों की । झालमुड़ी की झाल सभी के मुंह में भी लगी और आँखों में भी । झूमों नाचों और खाओ झालमुड़ी !
‘अहा झालमुड़ी बड़ी मजेदार’
अमीर हो या गरीब सभी खाएं झालमुड़ी,
नेता हो या नौकरशाह सभी खाएं झालमुड़ी,
हर किसी की जेब को भाए झालमुड़ी।‘
(मुनिरका एंक्लेव, दिल्ली)

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