सेंट्रल मार्केट प्रकरण -

सीनों में उम्मीद की 'लौ' जला गई 'सरकार'

- 'शांत' सेंट्रल मार्केट में फिर दिखी 'उम्मीदों की हलचल'

- मुख्यमंत्री के सलाहकार से लेकर आरएसएस और भाजपा की सक्रियता खिलाएगी नया 'गुल' 

मेरठ। 'सरकार' की लखनऊ से मेरठ तक की दौड़ सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के दिलों में उम्मीद की एक हल्की सी लौ जला गई। इस मामले में अचानक सरकार से लेकर आरएसएस और भाजपा की सक्रियता ने व्यापारियों के माथे पर पड़ चुके बलों को किसी हद तक कम कर दिया है। 

 मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी से लेकर आवास विकास के प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद, आवास आयुक्त बलकार सिंह और विशेष सचिव नीरज शुक्ला के साथ भाजपा नेताओं और व्यापारियों की बातचीत से उम्मीद की 'लौ' एक बार फिर से जलती दिख रही है। इसके अलावा इस मामले में आरएसएस भी अब एक्टिव मोड में दिख रही है। 

बुधवार को जब शासन-प्रशासन के आला अधिकारी सेंट्रल मार्केट के मामले में मंथन कर रहे थे तो तभी मेरठ पहुंचे आरएसएस के संयुक्त क्षेत्र प्रचारक प्रमुख कृपा शंकर भी शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में सेंट्रल मार्केट प्रकरण का 'राजनीतिक गुणा भाग' के रूप में विश्लेषण कर रहे थे। इस दौरान सांसद अरुण गोविल से लेकर डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और विधायक अमित अग्रवाल से लेकर संयुक्त व्यापार संघ तक सक्रिय भूमिका में दिखे। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है जिसके चलते सरकार से लेकर अधिकारी तक फूंक फूंक का कदम रख रहे हैं, लेकिन इन सब के बीच राजनीतिक सक्रियता बढ़ने से व्यापारियों को एक मध्यस्थता का एक 'सेतु' बनता दिख रहा है। 

सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को अब इस बात की उम्मीद जगी है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों का पक्ष मजबूती के साथ रखेगी। इसके तहत जहां दुर्बल आय वर्ग के मकानों में सेटबैक छूट का लाभ मिलने की उम्मीद भी जगी है वहीं आवास विकास के 1982 के बायोलॉज को लागू करने की कसरत भी शुरू हो सकती है।  इस मामले में जहां शासन का रवैया अब तक 'निष्क्रिय' दिख रहा था वहीं अब शासन स्तर पर सेंट्रल मार्केट को लेकर लखनऊ में उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित होगी। चर्चा है कि इस बैठक में लैंडयूज़ चेंज पॉलिसी के तहत भी कोई सर्वमान्य हल खोजा जा सकता है। व्यापारियों के अनुसार आवास विकास परिषद की ओर से प्रदेश सरकार की लैंडयूज़ चेंज पॉलिसी के तहत जमा शमन शुल्क का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखा गया था। कुल मिलाकर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अचानक शासन और भाजपा की सक्रियता ने व्यापारियों को उम्मीद की एक किरण जरूर दिखा दी है।

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