अर्थव्यवस्था से जुड़े शिक्षा
राजीव त्यागी
मौजूदा समय में शिक्षा को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की जरूरत है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी तरफ इशारा किया था। गौरतलब है कि भारत में जेन-जी की आबादी लगभग 37.7 करोड़ है, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। जेन-जी भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।
ऐसे में सरकार के द्वारा सेवा क्षेत्र में बढ़ते अवसरों के लिए जेन-जी पीढ़ी के अधिक लोगों को तैयार करना होगा। जेन-जी पीढ़ी की ऊर्जा को सही दिशा में निर्देशित किया जाना होगा, वहीं इस पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों में गहरी आस्था के साथ वैश्विक चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाना होगा। यह भी गौर करने लायक है कि जहां 2031 तक बड़ी संख्या में पारंपारिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं, वहीं एआई से जुड़ी करीब 40 लाख नई नौकरियां निर्मित होते हुए दिखाई देंगी।
ऐसे में देश की नई पीढ़ी को एआई आधारित नौकरियों के बढ़ते अवसरों के बीच एआई पेशेवर के रूप में सुसज्जित करना होगा। नई पीढ़ी को स्कूली शिक्षा के साथ प्रारंभिक स्तर से ही एआई से जोड़े जाने की रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। भारत में शोध एवं नवाचार को बढ़ाने में डिजिटल ढांचे और डिजिटल सुविधाओं की भी अहम भूमिका है। भारत आइटी सेवा निर्यात और वेंचर कैपिटल हासिल करने के मामले में लगातार आगे बढ़ रहा है। विज्ञान और इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तैयार करने में भी भारत दुनिया में सबसे आगे है। भारत के उद्योग-कारोबार तेजी से समय के साथ आधुनिक हो रहे हैं। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि देश के लिए बौद्धिक सम्पदा, शोध एवं नवाचार के बहुआयामी लाभ लगातार बढ़ रहे हैं।





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