पहले हाईकोर्ट बेंच दे तभी मवाना कोर्ट चलने देंगे
मेरठ बार एसोसिएशन की आम सभा में घोषणा, 'जस्टिस एट डोर स्टेप' लागू हो
मेरठ। मवाना में आऊटलाइन कोर्ट भवन के उद्घाटन का मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। मेरठ बार एसोसिएशन की आम सभा में यह घोषणा की गई कि मवाना में आउटलाइन कोर्ट तभी शुरू होने दी जाएगी, जब 'जस्टिस एट डोर स्टेप' सिद्धांत के तहत पहले मेरठ में हाई कोर्ट बेंच स्थापित की जाए।
पंडित नानक चंद सभागार में हुई आम सभा में बार पदाधिकारियों, पूर्व अध्यक्षों, महामंत्रियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कुल दस प्रस्ताव पारित किए। बैठक की अध्यक्षता मेरठ बार अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा ने की, जबकि संचालन महामंत्री परवेज आलम ने किया। सरधना में आउटलाइन कोर्ट निर्माण के लिए जमीन खरीद की कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव भी पास किया गया।
आम सभा में यह भी घोषणा की गई कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसी भी जनपद में आउटलाइन कोर्ट को बार तभी सहमति देगी, जब इसी सिद्धांत के आधार पर पश्चिम उत्तर प्रदेश को हाई कोर्ट बेंच प्रदान की जाए। हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर शनिवार की हड़ताल को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया।
अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि मवाना में पुरानी कोर्ट भी नए भवन में वकीलों के चैंबर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद ही शुरू होने दी जाएगी। वहां किसी नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि मवाना आउटलाइन कोर्ट की जमीन खरीद और भवन निर्माण में धांधली की गई है। उन्होंने कोर्ट मैनेजर की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए हाई कोर्ट से इस मामले की हाई पावर कमेटी अथवा सीबीआई से जांच कराने और कोर्ट मैनेजर को हटाने की मांग की।धांधली के साक्ष्य जुटाने के लिए सात वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक समिति बनाई गई है। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि मवाना कोर्ट के आसपास बनाई गई अनाधिकृत दुकानें हटवाने के लिए वे मंडलायुक्त से मुलाकात करेंगे।
मेरठ बार के अध्यक्ष अनुज शर्मा और महामंत्री परवेज आलम ने बताया कि हाई कोर्ट के नियमानुसार, जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर से अधिक दूरी पर ही आउटलाइन कोर्ट बनाई जा सकती है। हालांकि, मवाना कोर्ट मुख्यालय से मात्र 17 किलोमीटर दूर बनाई गई है, जो इस शर्त को पूरा नहीं करती।



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