अक्षय ऊर्जा और भविष्य
 इलमा अज़ीम 
मनुष्य के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम कैसे की जाए, जो प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जानें लेने लगा है और लगातार घटते प्राकृतिक संसाधन, जिनके अभाव में तो सुखद मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। गौर करें तो इन दोनों ही चुनौतियों अथवा समस्याओं का समाधान एक ही है- ऊर्जा के परम्परागत संसाधनों पर से निर्भरता को समाप्त करते हुए अक्षय ऊर्जा का अधिकाधिक उपयोग एवं कार्यान्वयन करना। 

अक्षय ऊर्जा यानी ऊर्जा का ऐसा स्रोत, जिसका कभी क्षय नहीं होता। अक्षय ऊर्जा का एक नाम स्वच्छ ऊर्जा भी है, जिसका तात्पर्य ऐसी ऊर्जा से है, जो वातावरण की स्वच्छता को न केवल यथावत बनाए रखने में सहयोगी हो, बल्कि आज की वैश्विक पर्यावरणीय चिंताओं से मुक्ति दिलाने में भी सहायक बने, ताकि ‘जलवायु परिवर्तन’ (ग्लोबल वार्मिंग) की विकराल होती समस्या से वैश्विक समाज को राहत मिल सके। आज के दौर में यदि किसी भी राष्ट्र को सर्वांगीण विकास करना है तो उसे प्रदूषण रहित अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का उपयोग करना ही पड़ेगा।  

              दरअसल, पृथ्वी पर ऊर्जा के परम्परागत संसाधन यथा- कोयला, पेट्रोलियम और कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, लकड़ी, बायोमास इत्यादि सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि सदियों से इनका अंधाधुंध दोहन जारी है। यदि ऊर्जा के इन परम्परागत संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं किया गया और इनका इसी प्रकार लगातार दोहन किया जाता रहा तो ऐसी संभावना है कि निकट भविष्य में ऊर्जा के ये संसाधन समाप्त हो जाएंगे और दुनिया भर में ऊर्जा का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा।

 ऊर्जा के आसन्न संकट की भयावहता को समझते हुए आज के दूरदर्शी समाज ने विश्व भर में ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोतों के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की, जिसके उपरांत वैश्विक स्तर पर मनुष्य ने ऊर्जा के अक्षय स्रोतों से ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करने का प्रयास शुरू किया। वहीं, भारत में भी ऊर्जा के अक्षय स्रोतों के विकास और उनके उपयोग को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सन् 2004 से ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं। 

 यदि अक्षय ऊर्जा से जुड़े लक्ष्यों को समुचित ढंग से नीति बनाकर उसे निवेश के साथ जोड़ा जाए तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती तो मिलेगी ही, साथ ही, पर्यावरणीय चुनौतियों से भी बहुत हद तक मुक्ति मिलेगी। इतना ही नहीं, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में नीतिगत निवेश को बढ़ावा देकर दुनिया भर के करोड़ों लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। 

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