मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर एसएसपी से मिले उलेमा
मेरठ। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को शाही ईदगाह और जामा मस्जिद के खतीब क़ारी शफ़ीकुर्रहमान क़ासमी के नेतृत्व में एसएसपी अविनाश पांडे से मिला और मस्जिदों के लाउडस्पीकर तथा रमज़ान के दौरान सहरी व इफ्तार के ऐलान से जुड़े मुद्दे पर अपना पक्ष रखा।
कारी शफ़ीकुर्रहमान कासमी ने एसएसपी को बताया कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अज़ान और रमज़ान के दौरान सहरी व इफ्तार के समय की सूचना देने के लिए ही किया जाता है, इसलिए इन चंद मिनटों के लाउडस्पीकर उपयोग से किसी प्रकार का विशेष ध्वनि प्रदूषण नहीं होता, लिहाज़ा मस्जिदों के लाउडस्पीकर न उतारे जाएं। यह भी कहा गया कि कोतवाली का सायरन आज़ादी के बाद से लेकर अब तक लगातार बजता रहा है, जिसे सिविल डिफेंस के लोग संभालते थे, लेकिन रमज़ान के पहले तीन दिन बजने के बाद उसे भी बंद कर दिया गया। उलेमा ने कहा कि भले ही कोई नई परंपरा शुरू न हो लेकिन पुरानी परंपराओं को जारी रखने में कोई रोक टोक भी न की जाए। इस मुद्दे पर एसएसपी ने तुरंत एसपी सिटी से फोन पर बात की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। एसएसपी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जो भी कानूनी रूप से उचित होगा, वही किया जाएगा। यह भी तय हुआ कि प्रतिनिधिमंडल एसपी सिटी के साथ एक बैठक करेगा जिसमें सब कुछ तय होगा।प्रतिनिधिमंडल में हाजी राशिद, हाजी समी सलमानी, अतीक अलवी, राव खालिद, मौलाना आज़ाद, ज़ैद सिद्दीकी, जुनैद अंसारी, मुहम्मद मुआज़, क़ारी अफ्फ़ान क़ासमी, क़ाज़ी हस्सान क़ासमी और अब्बास एडवोकेट शामिल थे।


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