मोटापा एक साइलेंट कीलर - डा आर सी गुप्ता
विश्व मोटापा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
मेरठ। विश्व मोटापा दिवस के उपलक्ष्य में लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग द्वारा एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर. सी. गुप्ता, एस.आई.सी. डॉ. सुधा कुमारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपमा वर्मा, सर्जरी विभाग के आचार्य डॉ. धीरज बालियान, मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. योगिता सिंह,एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या गौतम, प्रोफेसर डॉ. श्वेता एवंडॉ. स्नेहलता वर्मा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. आर. सी. गुप्ता ने मोटापे को एक "साइलेंट किलर" बताया और जोर देकर कहा कि जन-स्वास्थ्य की भलाई के लिए मोटापे के प्रति जागरूकता केवल एक दिन का विषय नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाला अभियान होना चाहिए क्योंकि यह हृदय रोग और हाइपरटेंशन जैसी घातक बीमारियों की नींव रखता है।एसआईसी डॉ. सुधा कुमारी ने मोटापे को आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए अनुशासन पर बल दिया और सर्जरी विभाग के डॉ. धीरज बालियान regular exercise व्यायाम, उचित आहार जोर देकर कहा ,कि सब काम मशीनों से होने के कारण गांव में भी मोटापा बढ़ रहा है इसी क्रम में सीएमएस डॉ. अनुपमा वर्मा ने बाल-मोटापे (Childhood Obesity) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज में व्याप्त उस खतरनाक मिथक का खंडन किया जिसमें लोग भारी-भरकम या 'गोल-मटोल' बच्चों को स्वस्थ मानते हैं; उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटापा बचपन में ही बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा (Developmental Delay) डाल सकता है और भविष्य में उन्हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी जटिलताओं का शिकार बना सकता है। , विभागाध्यक्ष endocrinology Dr. Sandhya Gautham बताया किमोटापा एक वैश्विक बीमारी है जिसमें कई बीमारियों जड़ है जैसे की diabetes hypertension एवं ऑस्टियोपोरो इसलिए इसकी रोकथाम बहुत जरूरी है वहीं medicine विभागाध्यक्ष डॉ. योगिता सिंह और प्रोफेसर डॉ. स्नेहलता वर्मा व डॉ. श्वेता सिंह ने मधुमेह और मोटापे के सीधे संबंध पर प्रकाश डाला।
डॉ. अविनाश शर्मा, डॉ. आयुषी सिंघल, डॉ. गुरसिमरन सिंह और डॉ. शशांक शेखर ने मरीजों को वैज्ञानिक तथ्यों से अवगत कराते हुए बताया कि आज मशीनी युग और प्रोसेस्ड फूड की सुलभता के कारण गांवों और शहरों के बीच का अंतर मिट गया है और दोनों ही जगह लोग मोटापे की चपेट में हैं। डॉ. शशांक ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि यदि समय रहते जीवनशैली में बदलाव न किया गया, तो आने वाली पीढ़ी को कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। कार्यक्रम के अंत में मरीजों को प्रोत्साहित किया गया कि वे विशेषज्ञ परामर्श के लिए प्रत्येक गुरुवार और शनिवार को विभाग की ओपीडी में संपर्क करें, जहाँ चार्ट और चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से उन्हें मोटापे के चक्रव्यूह से निकालने के लिए पूर्ण चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।


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