इस जगत का हाल कबीरा, सब के सब बेहाल कबीरा!

 राष्ट्रीय साहित्य चेतना मंच की मासिक गोष्ठी

पानीपत। राष्ट्रीय साहित्य चेतना मंच की मासिक गोष्ठी का आयोजन विहान ऑफिसर्स क्लब पानीपत रिफाइनरी टाउनशिप में आयोजित किया गया। इस गोष्ठी में आए रचनाकारों ने अपनी काव्य रचना से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सिराज पैकर ने की जबकि मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवि नरेश लाभ रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध कवि कृष्ण कुमार निर्माण और अजय जोशी जी रहे। कार्यक्रम का संचालन लोकप्रिय हास्य कवि मनु बदायूंनी ने किया और गोष्ठी का आरंभ श्रीमती आराधना सिंह अनु जी ने सरस्वती वंदना के साथ किया।
गोष्ठी में प्रदेश भर के प्रसिद्ध रचनाकारों और शायरों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पनीपत के वरिष्ठ साहित्यकार सिराज पैकर ने कहा-
रात को दिन में बदलने का हुनर आता है,
मै हूं सूरज मुझे जलने का हुनर आता है।
उसके कदमो को लिपट जाती है आकर मंज़िल,
भीड़ से जिसे निकलने का हुनर आता है।
शिक्षाविद और कवि कृष्ण कुमार निर्माण ने अपने विचार कुछ इस अंदाज में रखा--
इस जगत का हाल कबीरा,
सब के सब बे हाल कबीरा।
वक्त नहीं है सच कहने का,
रहले चुप फिलहाल कबीरा।
इसके बाद अजय जोशी ने-
लगाकर आग फूलों में उजाले कौन करता है
चमन को इस तरह ग़म के हवाले कौन करता है।
इसके बाद नरेश लाभ ने अपनी रचना-
 अहंकार को छोड़िए मृदुल बने मन भाव
मिले जगत में प्रेम भी सबसे रहे जुड़ाव।
प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में कवयित्री मनु बदायूंनी ने पढ़ा--
हाथ में लेकर कलम  बेटी ने पापा लिखा
बात तो ये थी ज़रा सी पर असर ज़्यादा लगा
इनके अलावा धर्मेंद्र अरोरा मुसाफ़िर, अनुपिंदर सिंह अनूप, आकांक्षा मिश्रा मनु, अरुण कुमार पानीपत, प्रदीप चौहान दीप, आराधना सिंह अनु, सूरज स्वरांश, डॉ. ओमवीर जांगड़ा, मीणा दहूजा, राजकुमार जायसवाल, मनोज मधुरभाषी आदि ने अपनी बेहतरीन रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अंत में अनुपिंदर सिंह अनूप जी ने सभी कवियों और कवयित्रियों का आभार व्यक्त किया।
फोटो परिचय- काव्य गोष्ठी में शामिल कविगण।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts