मंडप शादी का : प्रदर्शन नहीं संस्कार


- प्रो. नंदलाल, चित्रकूट
अरे भाई जरा जल्दी करो। यार कोई सुनता ही नहीं। यहां बड़े विचित्र लोग हैं।आकर बैठ गये और गप्पे हांक रहे हैं।अभी तक पण्डिजी भी नहीं आये।काफी लेट होता जा रहा है। हांफते हुए लड़की पक्ष के फूफा जी बोल रहे थे।चारों तरफ से बच्चे, युवा,महिलाएं सब एकत्र हो रहे हैं।ठंड हल्की हल्की है।कुछ लोग सूट पहने हैं, कुछ लोग कुर्ता पायजामा जैकेट पहने हैं। महिलाएं तरह तरह की रंग बिरंगी साड़ियाँ पहनी हुई हैं। एक आध महिलाएं शाल लेकर आई हैं तो और लहंगा चुन्नी से लेकर न जाने कौन कौन फैशन करके आती जा रही हैं। फैशन के नाम पर कुछ लोग अपना प्रदर्शन कर रहे है तो कुछ तो ऐसे आ रहे हैं जैसे मानो बाजार में कपड़ा ही नहीं है। बच्चे चहक रहे हैं उन्हें वहां एक नई दुनिया दिखाई दे रही है।इधर से उधर वे उछल कूद कर रहे हैं तो कुछ वयस्क दारू के नशे में धुत द्वारचार के समय दूल्हे के मित्रों के साथ नाचते नाचते सड़क पर औंधे मुँह गिर पड़ रहे हैं।
        द्वारचार के समय दो तीन पंडित कलश के पास बैठकर जोर जोर से मंत्रोच्चार कर रहे हैं वे कौन सा मंत्र पढ़ रहे हैं कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा है क्योंकि वे दो तीन की संख्या में हैं और उनकी आवाजें आपस में टकरा रही हैं। उधर डीजे भी जोर जोर से बज रहा है लॉलीपॉप लागेलु। दुल्हा पक्ष के लोग जमकर पिये हुए हैं और डी जे के गानों पर डांस करते करते गिर रहे हैं।इतने में द्वारचार का समय बीत जाता है लोग नाश्ते और गोलगप्पे, चाट पर टूट पड़ते हैं। एक दूसरे को रगड़ते धकियाते अपना अपना प्लेट हाथ में लेकर ठूस ठूंसकर खा रहे हैं। कोई भी ऐसा आइटम रह न जाए जिसको लिया न जाय। खा पीकर लोग रफू चक्कर होने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।  इधर जयमाल भी तो होना है। लड़की मेकअप कराकर अभी आई ही नहीं है।सो जयमाल में विलंब देख लड़के के फूफा जी कूद रहे हैं और कह रहे है कि तुम लोगों से मै बार बार कह रहा था कि और कार्य तुम लोग जैसे भी करो पर शादी सही मुहूर्त और सही ढंग से होनी चाहिए। बताओ अभी जयमाल तक नहीं हुआ और बारह बजने को हो गए।
     लड़की और उसकी सहेलियां मेकअप के बाद पहुंचती हैं। लड़की का भाई जोर से आवाजें दे रहा है कि जल्दी करो । चार लड़के फूलों से सजा चादर उठाकर उसके नीचे लड़की को बुलाकर जयमाल के लिए ले जा रहे हैं। सामने पटाखे और बम चल रहे हैं और कैमरामैन्स अपना अस्त्र शस्त्र लेकर युद्ध पर निकल पड़ते हैं। दे दना दन सटाक फटाक की आवाज के साथ कैमरे अपना काम करना शुरू कर देते हैं। ऊपर आकाश की तरफ एक हेलीकॉप्टर जैसी आवाज आ रही है जिसको ड्रोन कहते हैं अर्थात पूरी फौज युद्ध पर लड़ रही है।जयमाल शुरू होता है। देश में जितने गाने हो सकते हैं वे जयमाल के समय बज रहे हैं और लड़के लड़कियां डी जे पर डांस कर रहे हैं। कमजोर दिल वाले घराती और बाराती डीजे की तेज साउंड के कारण परेशान हैं और अपने दिल को सम्हाल रहे हैं। जयमाल चल रहा है कुछ रिश्तेदार नात अपनी अपनी कॉलर और टाई ठीक कर रहे हैं उन्हें मंच पर दूल्हे और दुल्हन को आशीर्वाद जो देना है। महिलाएं और लड़कियां सहेलियां भी अपने अपने बाल और मेकअप को निहार रही हैं। रात के डेढ़ बज गए अभी फोटो सूट चल रहा है।इधर फूफा जी का पारा सातवें आसमान पर है। मुहूर्त निकला जा रहा है।
      इस बीच चढ़ावे का कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है।सोने चांदी की महगाई ने लोगो की कमर तोड़ दी है सो दो तीन सोने के जेवर और चांदी के आभूषण और कुछ साड़ियां चढ़ावे में चढ़ा दी गई हैं। कुछ बुजुर्ग महिलाएं जिन्हें पहले जमाने के गाने जो गाली गीत के नाम से जाना जाता है उसे जोर जोर से गा रही हैं। इधर फूफा जी गाली सुन सुनकर आगबबूला हो गये भड़क गये और शादी का मंडप छोड़कर बाहर जाने लगे। लोग उन्हें मनाने की कोशिश में लगे हैं। शादी का आधा मुहूर्त निकल चुका है । दोनों पक्ष के पंडित आपस में भिड़े हुए हैं कि आपकी वजह से मुहूर्त निकल रहा है। अब बिना मुहूर्त के पंडित संक्षिप्त शादी कराने पर मजबूर हैं। बिना मुहूर्त के शादी के मंत्र बोले जा रहे हैं। जल्दी जल्दी शादी और सप्तपदी का कार्यक्रम निपटाया जा रहा है।
मंडप में आठ दस लोग ही बचे हैं शेष तो खाना खाने और कुछ जयमाल के बाद जा चुके हैं। कुल मिलाकर शादी सिर्फ प्रदर्शन की बात रह गई है। प्रदर्शन और प्रदर्शन। शादी के संस्कार को छोड़कर सभी चीजें वहां हो रही हैं। लाखों रुपये फूंके तापे जा रहे हैं पर फूफा की नाराजगी को कोई समझने को तैयार नहीं है उनकी बात तो सौ फीसद सही थी कि शादी का मुहूर्त निकल रहा है।
     लड़की विदा हो रही है।आँख में आंसू हैं पर बिछड़ने के नहीं। इसलिए कि आज के दुल्हा और दुल्हन चार छह महीने पूर्व से ही एक दूसरे से भलीभांति परिचित हो चुके रहते हैं और अपनी मिलीभगत के आधार पर पूरे शादी की प्लानिंग किए रहते हैं।
क्या इसी को शादी कहते हैं। नहीं शादी हमारे संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है जहां दो व्यक्ति दो परिवारों से जीवन बंधन में बंधते हैं। एक दूसरे के सुख-दुख के भागीदार होते हैं और सात जन्म तक एक साथ रहने की कसम खाते हैं। वह प्रदर्शन नहीं अपितु आध्यात्मिक बंधन है। इसे प्रदर्शन की विषय वस्तु न बनाइये। अपने बच्चों में संस्कार भरिये।

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