विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
काशीपुर के सीमावर्ती गांवों में सुलगती अवैध शराब की भट्टियां और नशे का काला कारोबार
काशीपुर (उधम सिंह नगर)। उत्तराखंड का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला काशीपुर क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर सामाजिक और कानूनी संकट की गिरफ्त में है। तहसील काशीपुर के थाना आईटीआई अंतर्गत चौकी पैगा क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों से डराने वाली जमीनी हकीकत सामने आ रही है। स्थानीय नागरिकों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ग्राम खाई खेड़ा, छोटी बरखेड़ी, बड़ी बरखेड़ी, भोला सिंह का डेरा, कटैया और कनकपुर जैसे इलाकों में अवैध कच्ची शराब का निर्माण और मादक पदार्थों की तस्करी एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी है।
श्मशान से लेकर नहरों तक धधक रही हैं भट्टियां
हैरानी की बात यह है कि मौत के तांडव का सामान तैयार करने वाली ये अवैध भट्टियां अब केवल जंगलों तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी के किनारों, नहरों के पास और नालों के आसपास तो यह काम हो ही रहा है, लेकिन संवेदनहीनता की पराकाष्ठा यह है कि श्मशान घाटों तक का उपयोग अवैध शराब बनाने के लिए किया जा रहा है। कच्ची शराब के इस खुलेआम निर्माण ने समूचे क्षेत्र के वातावरण को दूषित कर दिया है।
नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी: स्मैक और हेरोइन का जाल
कच्ची शराब के साथ-साथ इस क्षेत्र में गांजा, स्मैक और हेरोइन जैसे घातक नशीले पदार्थों की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है। स्थानीय युवाओं में बढ़ती नशे की लत ने कई परिवारों को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि यह केवल एक छोटा अवैध धंधा नहीं, बल्कि एक बड़ा सिंडिकेट है जिसने इस काले कारोबार से अकूत संपत्ति अर्जित कर ली है। ऊँची रसूख और आर्थिक ताकत के दम पर ये तस्कर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल
यह क्षेत्र पहले भी पुलिसिया तंत्र और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहा है। हाल ही में किसान सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या कर पुलिस पर लगाए गए प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने विभाग की छवि पर गहरा दाग लगाया था। वर्तमान स्थिति में स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना, कहीं न कहीं स्थानीय प्रशासन और सफेदपोशों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं।
सुरक्षा और न्याय की गुहार
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने शासन-प्रशासन से इस गंभीर मुद्दे पर स्वतंत्र जांच और त्वरित स्ट्राइक की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन गांवों को 'नशा मुक्त' करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बेकाबू हो सकती है। फिलहाल, पैगा चौकी और आईटीआई थाना क्षेत्र के इन गांवों में सन्नाटा तो है, लेकिन नशे के इस कारोबार की आंच अंदर ही अंदर सुलग रही है, जो किसी भी दिन बड़े जन-आक्रोश का कारण बन सकती है।


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