नारी और नीर विषय पर वामा साहित्य मंच की संगोष्ठी सम्पन्न
सपना सी पी साहू
इंदौर। नारी और नीर दोनों ही सृष्टि के सर्जक हैं जो अपने आप में बहुत कुछ आत्मसात कर जीवन को नई दिशा और ऊंचाइयां देते हैं । मार्च माह में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला और विश्व जल दिवस पर इसी भाव को केंद्र में रख कर वामा साहित्य मंच की मासिक संगोष्ठी 'नारीऔर नीर ' विषय पर आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वाणी जोशी की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत मंजू मिश्रा ने किया । संस्था की अध्यक्ष ज्योति जैन ने अतिथियों और वामा सखियों का शब्दों से स्वागत करते हुए कहा कि नदी और स्त्री दोनों में अनेक समानता है।प्रकृति के विरुद्ध हो रहे कार्यों को रोकना ही वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है यह बात मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक ऋतुजा पहाड़े जी ने अपने उद्बोधन में कही। वे कहती है कि हम नदियों का पूजन तो करते हैं, लेकिन वास्तविक पूजन तब होगा जब हम पानी की एक-एक बूंद की कीमत समझेंगे।उन्होनें कहा दूसरों को डांटकर नहीं, बल्कि प्रेमपूर्वक समझाकर इस मुहिम से जोड़ना चाहिए, और यह तकनीक नारी बेहतर जानती है।कार्यक्रम में वामा साहित्य मंच की सखियों में शीला श्रीवास्तव ने मां के ऊपर एक बहुत सुंदर कविता सुनाई: संसार को जन्म देने वाली माते।तेरे आंखों में क्यों है आंसू, तेरे कोख से जन्म लेने वाले, तुझे क्यों हैं अक्सर रूलाते। तनुजा चौबे, डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र, संजीता जैन, प्रीति मकवाना, सुजाता देश पांडे आदि ने नारी और नीर विषय पर बहुत सुंदर कविताओं की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में पिंटू मिश्रा एवं सुरभि भावसार को सम्मानित किया गया।वामा साहित्य मंच की दो सखियां अमर खनूजा चड्ढा एवं माधुरी निगम को सम्मानित किया गया। साथ ही सुषमा मोघे जी को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन दिव्या मंडलोई, मंच पर उपस्थित थे ज्योति जैन , स्मृति आदित्य , शोभा प्रजापति , कविता अर्गल एवं आज के कार्यक्रम की हमारी अतिथि ऋतुजा पहाड़े । संचालन प्रीति दुबे ने किया।आभार संस्था सचिव स्मृति आदित्य ने माना।' श्री मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


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