बसंतकालीन गन्ना बुवाई हेतु केवल स्वीकृत एवं उन्नतीषील गन्ना किस्मों का ही करें चयन - राजीव राय
उच्च उत्पादन, बेहतर शर्करा प्रतिशत और रोग-मुक्त गन्ने के लिए स्वीकृत किस्मों का प्रयोग अनिवार्य
वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उत्पादकता वृद्धि व किसानों की आय में होगा इजाफा
मेरठ। गन्ना विकास विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों एवं अनुसंधान के आधार पर प्रतिवर्ष स्वीकृत एवं अनुशंसित गन्ना किस्मों की सूची जारी की जाती है। यह सूची गन्ना विकास विभाग के एस.जी.के ;ैळज्ञद्ध पोर्टल के साथ-साथ संबंधित गन्ना समितियों के परिसर एवं गोदामों तथा सूचना पट्टों पर भी प्रदर्शित की गई है, जिससे गन्ना कृषकगण आसानी से इसका जानकारी कर गन्ना बीज को प्राप्त कर सकते है।
उप गन्ना आयुक्त, मेरठ परिक्षेत्र राजीव राय ने क्षेत्र के समस्त गन्ना कृषकों से अपील की है कि वर्तमान समय बसंतकालीन गन्ना बुवाई का उपयुक्त अवसर है। ऐसी स्थिति में किसान केवल स्वीकृत एवं अनुशंसित गन्ना किस्मों की ही बुवाई करें। वैज्ञानिक रूप से अनुमोदित किस्मों का प्रयोग करने से फसल रोग-मुक्त, अधिक उत्पादक तथा बेहतर शर्करा प्रतिशत वाली प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि अस्वीकृत अथवा अवैज्ञानिक स्रोतों से प्राप्त बीज सामग्री के प्रयोग से कई बार रोग संक्रमण, कम अंकुरण तथा उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। इसलिए बुवाई से पूर्व किसान स्वीकृत किस्मों की सूची का अवश्य अध्ययन करें और प्रमाणित एवं स्वस्थ बीज का ही प्रयोग करें।
उप गन्ना आयुक्त ने मेरठ परिक्षेत्र के अंतर्गत कार्यरत समस्त फील्ड स्टाफ को भी निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्वीकृत गन्ना किस्मों की तालिका अपने साथ रखें तथा किसानों द्वारा जानकारी प्राप्त किए जाने पर उन्हें तत्काल अवगत कराएं। परिषद स्तर पर बसंतकालीन गन्ना बुआई हेतु आरक्षित बीज, गन्ना कृषकवार एस.जी.के पोर्टल पर फीड किये जाने हेतु भी निर्देशित किया गया है। साथ ही ग्राम स्तरीय बैठकों, किसान गोष्ठियों एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से भी किसानों को अनुशंसित किस्मों के प्रयोग हेतु प्रेरित किये जाने के निर्देश दिए गए है।उन्होंने यह भी कहा कि किसान वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप स्वीकृत किस्मों का चयन, स्वस्थ बीज का उपयोग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करेंगे तो इससे न केवल गन्ना उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि सुनिश्चित होगी।


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