यूपी में 50प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर इलेक्ट्रिक वाहन (ई.वी) चलाना चाहते हैं
मेरठ : देश के होमग्रोन मार्केटप्लेस, फ्लिपकार्ट ने‘‘द लास्ट माईल लीपः एम्पॉवरिंग डिलीवरी फ्लीट्स टू एक्सेलरेट इंडियाज़इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांज़िशन’’ रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के लिए भारतके लगभग 6,000 डिलीवरी पार्टनर्स का सर्वे किया गया। फ्लिपकार्ट कीइस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के डिलीवरी पार्टनर इलेक्ट्रिक वाहनअपनाने में बहुत ज्यादा रुचि रखते हैं। सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत डिलीवरीपार्टनर्स ने ई.वी अपनाने की इच्छा जाहिर की। इस सर्वे ने यूपी मेंडिलीवरी पार्टनर्स द्वारा ई.वी एडॉप्शन की जबरदस्त संभावनाएं प्रदर्शित कींक्योंकि यहाँ वाहन फाईनेंसिंग और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती सुविधाएंलगातार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अनुकूल वातावरण बना रही हैं।
फ्लिपकार्ट ग्रुप के हेड, सस्टेनेबिलिटी, निशांत गुप्ता ने कहा, ‘‘फ्लिपकार्टमें सस्टेनेबिलिटी एक मूल्य आधारित परिवेश का निर्माण करने से जुड़ी है, ताकि पृथ्वी और हमारे प्लेटफॉर्म को संचालित करने वाले लोगों को उसकालाभ मिल सके। इलेक्ट्रिक वाहनों में आय को स्थिर बनाने के साथऑपरेटिंग खर्च को कम करने की विशाल क्षमता है। साथ ही अंतिम छोर तकडिलीवरी इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए सबसे व्यवहारिक सेगमेंट्स में से एक हैक्योंकि शहरों में यह काफी फैली हुई सेवा है, जिसका उपयोग बहुत ज्यादाहोता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनुभव से ये नतीजे मिले हैं कि जबफाईनेंसिंग और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और सर्विसिंग सपोर्ट जैसी सुविधाओंके साथ ई.वी को बढ़ावा दिया जाएगा, तो ई.वी अपनाने में तेजी से वृद्धि होगीऔर लोगों को आजीविका मिलने के साथ पर्यावरण की रक्षा भी होगी।’’
ई.वी को अपनाने की सबसे अधिक इच्छा डिलीवरी पार्टनर्स ने प्रदर्शित की
इस स्टडी में सामने आया कि डिलीवरी पार्टनर्स ई.वी अपनाने में बहुत ज्यादारुचि रखते हैं। सर्वे में शामिल देश के लगभग 46 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर्सने इलेक्ट्रिक वाहन (ई.वी) अपनाने की इच्छा प्रकट की। इससे प्रदर्शित होताहै कि कार्यबल ई.वी अपनाने को पूरी तरह से तैयार है। लेकिन फिर भीइसका एडॉप्शन सीमित है। 94.3 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर अभी भी पेट्रोलपर चलने वाले टू-व्हीलर का इस्तेमाल करते हैं। इन नतीजों से प्रदर्शित होताहै कि ई.वी को अपनाने की इच्छा और इसके वास्तविक एडॉशन में एक बड़ाअंतर है, जो खासकर संरचनागत रुकावटों के कारण है।


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