बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित युग की आधारशिला- डा. राजकुमार सांगवान
शोध, नवाचार और विधिक संरक्षण पर सार्थक विमर्श
सीसीएसयू में दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार सेमिनार का शुभारंभ
मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि में आयोजित दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) जागरूकता सेमिनार एवं प्रतियोगिता का शुक्रवार को प्रथम दिवस अत्यंत गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षा गृह में किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं नवाचारकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद, बागपत डॉ. राजकुमार सांगवान रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने की।मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. कनिका मलिक, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली; डॉ. विकास भाटी, एसोसिएट प्रोफेसर (विधि), डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ; तथा डॉ. अमन दीप सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर (विधि), डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ उपस्थित रहे।
सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित युग की आधारशिला हैं और युवाओं को अपने नवाचारों को विधिक संरक्षण प्रदान कर राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध तभी सार्थक है जब उसका संरक्षण सुनिश्चित हो और वह समाज के हित में उपयोगी सिद्ध हो। कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार, शोध और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाएगी और उनके शोध कार्य को नई दिशा देगी।
कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर शैलेंद्र सिंह गौरव ने कहा कि यह सेमिनार विद्यार्थियों को शोध से पेटेंट और नवाचार से उद्योग तक की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान करता है तथा विश्वविद्यालय में नवाचार की सुदृढ़ संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य वक्ता डॉ. कनिका मलिक ने “कॉपीराइट का न्यायसंगत उपयोग बनाम साहित्यिक चोरी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बौद्धिक संपदा अधिकार” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के साथ कॉपीराइट और प्लेगरिज्म के प्रश्न और अधिक जटिल हो गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध और लेखन में नैतिकता का पालन अत्यंत आवश्यक है तथा न्यायसंगत उपयोग की सीमाओं को समझना प्रत्येक शोधार्थी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने बौद्धिक कार्य को समय रहते विधिक संरक्षण प्रदान करने और साहित्यिक चोरी से बचने की सलाह दी। डॉ. विकास भाटी ने “बौद्धिक संपदा वाद-विवाद और प्रवर्तन रणनीतियाँ” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी पेटेंट, ट्रेडमार्क अथवा कॉपीराइट का वास्तविक महत्व तभी है जब उसके प्रवर्तन की प्रभावी व्यवस्था हो। उन्होंने बताया कि बौद्धिक संपदा से जुड़े विवादों के समाधान के लिए सुदृढ़ विधिक रणनीतियों की आवश्यकता होती है और युवाओं को आईपी प्रबंधन के साथ-साथ उसके संरक्षण और प्रवर्तन की प्रक्रिया को भी समझना चाहिए।
उन्होंने शोध को उद्योग से जोड़ने और नवाचार को आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करने पर बल दिया। सेमिनार के प्रथम दिवस के द्वितीय सत्र में पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करना, शोध को विधिक संरक्षण देने की प्रक्रिया से अवगत कराना तथा उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। उत्तर प्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से आयोजित इस सेमिनार के प्रथम दिवस की सफलता ने विश्वविद्यालय परिसर को ज्ञान, उत्साह और नवाचार की सशक्त ऊर्जा से आलोकित कर दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ रवि प्रकाश डॉ योगेंद्र प्रताप डॉक्टर नाजिया तरुण डॉक्टर मोनिका डॉक्टर नेहा डॉक्टर शिवानी ढाका डॉक्टर पूर्णिया डॉक्टर दीपांजलि डॉक्टर लक्ष्मण नागर,डॉ. ज्ञानिका शुक्ला,नेहा चौधरी, डॉ. अमरदीप सिंह, कुशाग्र, डॉ कृष्ण मुरारी अग्निहोत्री,विजय धामा ,युवराज ,अनिल शुभम तथा विभाग के विद्यार्थी प्रियंका यादव, अंजली कुशवाहा, अनिकेत सागर, शिवम कुमार झा ,मोनिका सिंह, नेहा चौधरी ,हर्ष गुप्ता, अक्षय कुमार ,विवा कुमारी, मयंक ,मुनीश शर्मा ,शुभम ठाकुर, आकाश ,गौरव ,दीपक गौतम ,उर्मिला, अलीशा सिंह ,अमृता कुमारी, सुनील कुमार, वर्षा पटेल, आरती ,रिया सैनी, अश्वनी कुमार ,पूजा शर्मा, अमन अंजुम, काजल ,रश्मि, सौरभ ,मानवी ,संचित, अभिनव मोंगया द्वारा स्वयंसेवक के रूप में योगदान दिया गया



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