सभी के लिए सुलभ हो शिक्षा-भागवत
मेरठ। माधवकुंज में तीन दिवसीय आयोजित कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के सरसंचालक ने दूसरे दिन जन गोष्ठी के दूसरे सत्र में लोगों की जिज्ञासा समाधान करते हुए डॉ. भागवत ने अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए, शिक्षा पर बजट बहुत कम है, शिक्षा सबके लिए सुलभ कैसे हो सकती है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा बजट बढ़ाने का काम सरकार का है, लेकिन संघ का मत है कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो। प्राचीन काल में भी आप देखते हैं कि समाज के सहयोग से अनेक विद्यालय चलते थे, आज भी हमें वैसे ही परस्पर सहयोग और संस्कार की आवश्यकता है कि समाज बिना सरकारी सहायता के वंचितों को शिक्षित करे।
एक अन्य प्रश्न समानता लाने के लिए एक राष्ट्र-एक शिक्षा तथा एक राष्ट्र-एक स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता है इस पर संघ का क्या विचार है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए सर संघचालक ने कहा कि एक शिक्षा नीति है, एक स्वास्थ्य नीति भी है और इसमें क्षेत्रीय आवश्कताओं को दृष्टिगत् रखते हुए कुछ विषय जोड़ने की भी छूट है लेकिन इसे लागू करना राज्यों का विषय है। इसलिए संघ का प्रयास है कि ऐसी विषयों पर एक राय बने और समाज में एकरूपता आए।
सबसे पहले मूल्य आधारित शिक्षा लागू करनी होगी
एक अन्य प्रश्नकर्ता द्वारा पूछा गया कि आदर्श मूल्यों के क्षरण का क्या कारण है और संघ पर इसका क्या मत है? डॉ. भागवत ने इसका उत्तर देते हुए कहा कि सबसे पहले मूल्य आधारित शिक्षा लागू करनी होगी। समाज को संस्कारयुक्त वातावरण देना होगा। समृद्धि होना अच्छी बात है किन्तु वेदों में कहा गया है आप भरपूर कमाएं लेेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से रखते हुए शेष समाज हित में प्रयोग करें। एक अन्य प्रश्न में पूछा गया कि संघ सामाजिक समरसता पर कार्य कर रहा है लेकिन आज भी राजनीतिक दल जाति देखकर टिकट देते हैं, ऐसे में संघ का क्या मत है? इस पर उत्तर देते हुए डॉ. भागवग ने कहा कि संघ इस क्षेत्र में अत्यंत गहनता से कार्य कर रहा है, जो भी तत्व समाज को विघटित करने वाले हैं उनसे सावधान होना होगा और वह यह तभी करते हैं जब समाज ऐसा होता है। इसलिए हमें अपने व्यवहार में समरसता लानी होगी। समाज का वतावरण बदलना होगा और यह भाषण नहीं वरन् करने से होगा। यदि आप संघ को समझते हैं तो देखेंगे कि संघ में जाति विस्मरण होता है।
प्रश्नकर्ता द्वारा पूछा गया कि ओटीटी प्लेटफार्म पर अश्लील विषय वस्तु समाज को संस्कार रहित करने का प्रयास कर रही है इसका उत्तर देते हुए डॉ. भागवत जी ने कहा कि विषय वस्तु देखना हमारे विवेक पर निर्भर करता है। ओटीटी पर रामायण एवं हनुमान चालीसा भी है।
इससे पूर्व कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए क्षेत्र कार्यवाह डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि यह प्रमुख जन गोष्ठी समाज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों मे नेतृत्व करने वाले लोगों केे बीच हमारा विषय जाए इस हेतु रखी गयी है। आप सामाजिक चेतना के विषयों से जुड़े और भारत को पुर्नवैभव पर पहुंचाने का कार्य करें।
कार्यक्रम अध्यक्ष पदम्श्री भारत भूषण त्यागी जो कि जैविक खेती करने वाले कृषक हैं ने कहा कि संघ की पंच परिवर्तन की संकल्पन समाज में परिवर्तन ला रही है। यह विषय इतने गम्भीर हैं जो जन-जन से जुड़े हैं। उन्होंने खेती में रासायनिक पदार्थो के प्रयोग पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसलिए हमें इसके प्रयोग को वर्जित करना होगा उन्होंने संघ कार्य की सरहाना करते हुए कहा कि मैं अपना शेष जीवन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को समर्पित करता हूॅ।
केवल भौतिक उन्नति किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं होती
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि चोटीपुरा गुरूकुल की संस्थापिका डॉ. सुमेधा आचार्य ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है आज हम विकसित राष्ट्र बनने की संकल्पना को साकार की ओर हैं लेकिन हमें ध्यान रखना होगा केवल भौतिक उन्नति किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं होती इसलिए भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। आज समूचा विश्व बहुत चुनौतियों से जूझ रहा है। जिसमें पर्यावरण, नैतिकता का पतन, मानसिक अवसाद और सामाजिक विघटन प्रमुख हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन सब मुद्दांे पर काम कर रहा है। यह अत्यंत ही सराहनीय है।
कार्यक्रम में एकल गीत का वाचन शिरीश कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन बृज प्रान्त के सम्पर्क प्रमुख प्रमोद कुमार द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन मेरठ के विभाग सम्पर्क प्रमुख निपुण अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, सामाजिक संगठनों के प्रमुख व अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।



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