“डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम की त्रैमासिक समीक्षा बैठक

स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पीएसआई इंडिया के सहयोग से चल रहा कार्यक्रम

मुजफ्फरनगर, 27 फरवरी। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से जिले में चलाये जा रहे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम की त्रैमासिक समीक्षा बैठक शुक्रवार को एक स्थानीय होटल में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेश जैन की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

बैठक में पीएसआई इंडिया की कोमल एवं भारती ने कार्यक्रम सम्बन्धी गतिविधियों और प्रगति के बारे में विस्तार से चर्चा की। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिव्या वर्मा ने टीकाकरण, परिवार नियोजन की उपलब्धियों एवं कमियों पर समीक्षा कीI इसके साथ ही हेल्थ मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) रिपोर्टिंग फार्मेट पर विस्तृत रूप से समीक्षा की गयी I उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने डायरिया से बचाव के लिए बच्चों के पोषण और स्वच्छता पर खास ध्यान देने की बात कही। जिला चिकित्सालय की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा ने कहा कि डायरिया से बचाव के लिए शुरू के छह माह तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाएं। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. अल्का ने संचारी रोगों से बचाव के लिए घर और आस-पास साफ़-सफाई रखने की बात कही। यूनिसेफ की डीएमसी तरन्नुम ने टीकाकरण के संबंध में चर्चा की। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय शाही ने स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जैन ने कहा कि डायरिया से बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए जन जागरूकता बहुत जरूरी है। डायरिया से जुड़ी भ्रांतियों को भी दूर किया जाना चाहिए। पीएसआई इंडिया की भारती ने कार्यक्रम की पिछले तीन माह की प्रगति के बारे में बताया I उन्होंने बताया कि पीएसआई इंडिया द्वारा जनपद के 56 प्रमुख स्थानों पर डायरिया से संबंधित दीवार लेखन किया गया है, ताकि जन-जन में जागरूकता की अलख जगाई जा सके। ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य इकाइयों पर आशा एवं एएनएम की बैठक में प्रतिभाग कर डायरिया पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा अतिरिक्त छाया ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्रों का सहयोगात्मक निरीक्षण किया जा रहा है। ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य इकाइयों पर ओआरएस व जिंक कार्नर बनाने का कार्य किया जा रहा है। 643 आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आशा संगिनी का डायरिया पर अभिमुखीकरण किया जा चुका है, 494 महिला आरोग्य समिति सदस्यो एवं 229 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का भी अभिमुखीकरण किया जा चुका है I डायरिया कार्ड, पम्पलेट आदि प्रचार सामग्री (आईईसी) का वितरण किया गया है। एचएमआईएस रिपोर्ट को लेकर भी विस्तृत रूप से चर्चा हुईI

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग से बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) आयशा परवीन, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि, जिला एफपीएलएमआईएस मैनेजर डॉ. दिव्यांक,  एआरओ, शहरी और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने भी प्रतिभाग किया। इस मौके पर पीएसआई इंडिया से  शोभित सक्सेना आदि उपस्थित रहे।

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