कैमरे के सामने आया धागा कारोबारी

 बोला पुलिस अफसरों की सख्ती से सामने आया पूरा मामला

 मेरठ।  वर्दी की आड़ में धागा कारोबारी से लूट का एक मामला सामने आया है। लिसाड़ीगेट के इस्लामाबाद निवासी मोहम्मद राशिक ने एक महीने बाद पहली बार अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों की सख्ती और भरोसे के बाद ही उन्हें सच बोलने का साहस मिला।

पीड़ित कारोबारी के अनुसार, वह रोज की तरह बाइक से दुकान जा रहे थे। गोला कुआं के पास प्राइवेट कार में सवार दो वर्दीधारी दरोगाओं ने उन्हें रोक लिया। खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया। कारोबारी ने बताया कि उन्हें दिल की गंभीर बीमारी है और तीन स्टेंट पड़ चुके हैं, जिससे वह इस कार्रवाई से काफी घबरा गए।

आरोप है कि दोनों दरोगा उन्हें शहर से बाहर एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उन पर अवैध मनी ट्रांसफर का आरोप लगाते हुए 50 लाख रुपये की मांग की गई। उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां भी दी गईं। करीब तीन घंटे तक दबाव और भय का माहौल बना रहा।आखिरकार, 20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। पीड़ित ने अपने जीजा नईम को फोन कर रकम मंगवाई और अपनी जान बचाने की उम्मीद में पैसे दे दिए।घटना के बाद परिवार दहशत में रहा। कुछ समय बाद जब आरोपितों ने फिर से रकम मांगने के लिए फोन किया, तो पीड़ित ने हिम्मत जुटाई। उन्होंने अपने परिचितों के जरिए सीधे वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया।

आयुष विक्रम सिंह (एसपी सिटी) ने तुरंत उन नंबरों की डिटेल निकलवाई, जिनसे फोन आए थे। जांच आगे बढ़ी और मामला एसएसपी अविनाश पांडे तक पहुंचा।अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए सख्त रुख अपनाया और पीड़ित को न्याय का भरोसा दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दबाव में आरोपित दरोगाओं से 15 लाख रुपये की रकम वापस कराई गई और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

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