टैरिफ जंग में भारत की जीत!
कवलजीत सिंह
भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह व्यापार समझौता (Trade Deal) न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक निर्यात बाजार में भारत को एक 'महाशक्ति' के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है।
इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब भारत को अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी देशों- चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश-की तुलना में भारी टैरिफ लाभ प्राप्त हुआ है। इस कटौती के बाद, अमेरिका के लिए भारतीय उत्पाद अब चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की तुलना में काफी सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा की है, जिससे भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया है। इससे दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ट्रेड विवाद कम होंगे। नई डील के साथ, वॉशिंगटन ने अतिरिक्त पेनल्टी हटा दी है और कुल रेट कम कर दिया है।
यह भी सूचना है कि यूनाइटेड स्टेट्स ने रूसी तेल इंपोर्ट से जुड़ी दंडात्मक ड्यूटी हटा दी है, जिससे सिर्फ़ संशोधित रेसिप्रोकल टैरिफ ही लागू रहेगा। अब नई टैरिफ संरचना के साथ, भारत को इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी एक्सपोर्ट अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट फायदा है, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम की तुलना में कम टैरिफ रेट हैं। चीन और पाकिस्तान की तुलना में, भारत में अब काफी कम टैरिफ हैं। जो कई क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है।





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