ममता सरकार को सुप्रीमकोर्ट से बड़ा झटका

 कर्मचारियों को 10 साल का बकाया डीए देने का दिया आदेश
नई दिल्ली (एजेंसी)।सुपरीमकोर्ट ने ममता सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार को साल 2009 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) तुरंत जारी करे। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने साफ किया कि महंगाई भत्ता कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का 'वैधानिक अधिकार' है। कोर्ट ने सरकार की उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें खजाने की तंगी का हवाला देकर भुगतान से बचने की कोशिश की गई थी।
बकाया भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू बनाने और इसे किस्तों में देने का तरीका तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है-
कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा करेंगी जबकि समिति में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और कैग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य सरकार बिना किसी देरी के पारदर्शी तरीके से कर्मचारियों को उनके हक का पैसा पहुंचाए।
यह फैसला उन तमाम अपीलों के बाद आया है जिनमें राज्य सरकार ने निचली अदालतों में हार मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों का आर्थिक हक उनकी पहली प्राथमिकता है।

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