उच्च शिक्षा उत्कृष्टता और ज्ञान की खोज का माध्यम है - प्रो. एचसीएस राठौर
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना: गुणवत्ता, समानता और वैश्विक उत्कृष्टता के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण”का प्रथम दिवस गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अटल सभागार में दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि एवं वीज वक्ता प्रो. एच.सी.एस. राठौर, अध्यक्ष, एनआरसी-एनसीटीई, नई दिल्ली ने कहा कि उच्च शिक्षा उत्कृष्टता और ज्ञान की खोज का माध्यम है तथा विश्वविद्यालयों को मात्र विस्तार नहीं बल्कि गुणवत्ता उन्नयन पर ध्यान देना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो. जे.एस. राजपूत, पूर्व अध्यक्ष, एनसीटीई एवं एनसीईआरटी, नई दिल्ली ने शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के समन्वित विकास को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए बहुविषयक दृष्टिकोण को आवश्यक बताया । उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को संकीर्ण सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता; उसमें संवाद, स्वतंत्र चिंतन और सहयोग की संस्कृति विकसित करनी होगी।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक ज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को जिज्ञासा और सृजनात्मकता का वातावरण तैयार करना चाहिए, तभी वास्तविक उत्कृष्टता संभव है अतिथि वक्ता प्रो. एन.सी. लोहानी, माननीय कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी ने उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने,बहुभाषिकता और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। प्रो. अलेना हास्कोवा, कॉन्स्टैंटाइन द फिलॉसफर विश्वविद्यालय, नित्रा, स्लोवाकिया ने ऑनलाइन संबोधन में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विचार व्यक्त किए। प्रो. पायल मागो, निदेशक, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने डिजिटल युग में शिक्षण पद्धति के पुनर्संरचना और एआई के संतुलित उपयोग पर बल दिया।
प्रो. बीरपाल सिंह, निदेशक ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों और नवाचारों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई । इसी अवसर पर प्रो. सुरक्षा पाल, पूर्व अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, शिक्षा विभाग ने अपने उद्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता आज गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को वास्तविक अर्थों में बहुविषयक और मूल्यआधारित बनाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक तैयारी, अकादमिक अनुशासन और विद्यार्थियों में जिज्ञासा एवं सृजनात्मकता के विकास पर विशेष बल दिया।
उच्च शिक्षा को बहुविषयक, समावेशी और शोध-आधारित बनाकर ही गुणवत्ता और वैश्विक उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती - कुलपति
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. संगीता शुक्ला, अध्यक्ष, उद्घाटन सत्र एवं कुलपति, ने कहा कि उच्च शिक्षा को बहुविषयक, समावेशी और शोध-आधारित बनाकर ही गुणवत्ता और वैश्विक उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है कार्यक्रम के अंत में प्रो. विजय जायसवाल, सह-संयोजक, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं पूर्व अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, शिक्षा विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया ।उद्घाटन सत्र के पश्चात तकनीकी सत्र–1 एवं 2 का आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से किया गया, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020, गुणवत्ता आश्वासन और शिक्षक शिक्षा सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई ।


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