गौरवान्वित कुत्ते


- ललिता  जोशी
कुत्ते और इंसान का संबंध सदियों पुराना है । वैसे तो कुत्ता इंसान का वफादार साथी है और इस सामाजिक प्राणी के साथ वह बड़े ही सामाजिक और सभ्य तरीके से रहता है । अपने मालिक की आँख का तारा और शान है कुत्ता । कुत्ते की कई नस्लें हैं ये हजारों से लेकर लाखों की कीमत तक होते हैं । आजकल कुत्ते चर्चा का विषय हैं ।  कुत्तों के लिए आदमी का आदमी से  कुत्तों की तरह भयंकर झगड़ा होता है । कोई कुत्तों को खाना खिलाना चाहता है तो कोई उसका विरोध करता है । झगड़े का कारण कुत्ता ।  
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरों को भी कुत्ता प्रिय ,यमराज का दूत कुता, धर्म का प्रतीक कुत्ता ,ऋग्वेद में इन्द्र की दिव्य कुतिया सरमा का उल्लेख आता है ,भगवान दत्तात्रेय के साथ भी चार कुत्ते दर्शाये गए हैं । इसके अतिरिक्त ग्रहों की शांति के लिए काले कुत्तों को खाना खिलाना शुभ माना जाता है । इतनी मान्यताओं के बावजूद कुत्तों को हिकारत की नज़र से भी देखा जाता है । अक्सर कुत्ता गाली के रूप में प्रयुक्त किया जाता है । कुत्ते को चाहे गाली दो या चाहे उसे  स्वामिभक्त मानो क्या ही फर्क पड़ता है।

 वैदिक युग  से लेकर आज कलयुग में भी कुत्ता मनुष्य का समकालीन बना हुआ है और उसके दिल पर राज भी करता है । कुत्ते को जानवर तो समझा ही नहीं जाता । वो तो अपने पालनकर्ता  के घर का लाड़ला सदस्य होता है ।
आधुनिक और सभ्य मानव का युद्ध कुत्ते के लिए हो रहा है । वो कुत्ते के लिए कुत्ते की तरह लड़ रहे हैं । अरे भाई नौबत यहाँ तक आ चुकी है कि अब यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंची है ।  143 करोड़ के इस देश में जहां लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जदोजहद्द में लगे हुए वहाँ अपने देश में एक वर्ग ऐसा जो कुत्ताधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं । चाहे ये कुत्ते कितने ही लोगों, बच्चों, वृद्धों को काट- काट कर मार ही डालें। मानवाधिकारों का तो पता नहीं लेकिन कुत्ताधिकारों की लड़ाई के लिए हमारे लड़ाके कमरकस कर बैठे हुए हैं । आदमी अपनी जगह है कुत्ता अपनी जगह लेकिन हैं दोनों एक दूसरे के सह-अस्तित्व में रहते हैं ।

कुत्तों को लेकर जो लड़ाइयाँ गली मोहल्लों में लड़ी जाती थी वो अब कोर्ट में प्रविष्ट कर चुकी हैं ।कुत्तों के लिए काम करने वाले एक्टिविसट कुत्तों के लिए पी आई एल दायर कर रहे हैं ।  अरे अब  तो कुत्तों को भी अब अपने कुत्ते होने पर गर्व महसूस हो रहा होगा । अपने यहाँ आजकल ए आई समिट की धूम मची हुई है । इस समिट में बहुत से देशों के दिग्गज पधारे हुए हैं । आज तो बहुत से स्कूल ,कॉलेज और विश्वविद्यालय इस विषय में अपने यहाँ ए आई के पाठ्यक्रम चला रहे हैं । ऐसे बहुत से शिक्षण संस्थान  हैं जिन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय ए आई समिट में अपनी सहभागिता कर अपनी धाक जमाई है । मगर यहाँ भी कुत्ते के कारण हमारी एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय  विवादों के घेरे में आ गया ।
अरे भाई  पड़ोसी के रोबोटिक कुत्ते को अपना कह कर  पेश कर दिया बस कुछ ही देर में उनकी कलई उतर गई । हो गया फजीता उनका । एक कुत्ते की अहमियत तुम क्या जानो गलगोटिया जी । आपकी लंगोटी खोल दी कुत्ते ने । इतनी बेइज्जती करा दी कुत्ते ने इनकी । ये यही तक नहीं  थमा । कुत्ते वो भी एक चीनी कुत्ते ने उन्हें समिट छोड़ने पर मजबूर कर दिया । अब तो कुत्तों को अपने कुत्ते होने पर और भी ज्यादा गर्व हो रहा होगा । अब कुत्ते भी  गर्व  भोंकेंगे की वो कुत्ते हैं । कुत्ते भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद उत्पन्न कर सकते हैं और चोरों को अहिंसक तरीके से बाहर का रास्ता दिखाने की क्षमता रखते हैं ।
(मुनरिका एन्क्लेव, दिल्ली)

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