भौतिकी विभाग में होमी भाभा व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ

 मेरठ। होमी भाभा व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,  के भौतिकी विभाग में फैकल्टी मेंबर्स, रिसर्च स्कॉलर्स एवं विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम फिजिक्स एसोसिएशन द्वारा वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार तथा भौतिक और एप्लाइड साइंस के बीच एक सशक्त संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। उद्घाटन व्याख्यान कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. प्रशांत राघवन द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनुज कुमार के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में होमी जहांगीर भाभा के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार डॉ. भाभा ने भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम को एक सुदृढ़ दिशा प्रदान की और भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया।

इस अवसर पर होमी जे. भाभा के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित एक प्रेरणादायक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। डॉक्यूमेंट्री में उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाया गया, विशेष रूप से वर्ष 1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना, जिसने भारत में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान की नींव रखी।

इसके पश्चात मुख्य अतिथि, साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. हरे कृष्णा ने व्याख्यान श्रृंखला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की अकादमिक पहलें बेसिक साइंस और एप्लाइड रिसर्च के बीच की दूरी को कम करती हैं तथा छात्रों और शोधार्थियों के शैक्षणिक एवं अनुसंधान दृष्टिकोण को व्यापक बनाती हैं।

इस क्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह व्याख्यान श्रृंखला छात्रों के लिए एक अत्यंत सकारात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत है, जो उन्हें अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।डॉ. योगेंद्र के. गौतम ने मुख्य वक्ता प्रो. प्रशांत राघवन का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया और उनकी शैक्षणिक एवं अनुसंधान उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. प्रशांत राघवन ने ऊर्जा स्थिरता, लिथियम-आयन बैटरी के कार्य सिद्धांत, सामान्यतः प्रयुक्त एनोड एवं कैथोड सामग्री, मैग्नीशियम-आयन बैटरी, क्वासी-सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट्स तथा पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने अगली पीढ़ी की ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें लचीले, मोड़ने योग्य एवं रोल करने योग्य ऊर्जा भंडारण उपकरण, टेक्सटाइल-आधारित लिथियम-आयन इलेक्ट्रोलाइट्स, इलेक्ट्रोस्पिनिंग प्रक्रियाएँ, इलेक्ट्रोस्पन झिल्लियाँ, कमल के धागे तथा उच्च-प्रदर्शन टेक्सटाइल बैटरियाँ शामिल हैं।

समापन सत्र में डॉ. नीरज पँवार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और बैटरी विज्ञान के क्षेत्र में भारत के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं का उल्लेख करते हुए अगस्त्य मुनि को बैटरी की अवधारणा का प्रारंभिक प्रवर्तक बताया, जिससे भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत उजागर होती है।

पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कविता शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. संजीव कुमार शर्मा, प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. के. के. शर्मा, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. अनिल कुमार यादव तथा डॉ. विवेक कुमार नौटियाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन फिजिक्स एसोसिएशन द्वारा किया गया, जिसमें अध्यक्ष मिस्टर पवन कुमार तथा सदस्य मिस काजल, मिस्टर अनश मलिक, मिस सिमरन वर्मा, मिस्टर जिशान, मिस्टर आशीष, मिस अंशिका शर्मा, मिस साक्षी एवं मिस ललिता का विशेष योगदान रहा।अंत में यह स्पष्ट किया गया कि यह व्याख्यान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में “होमी भाभा व्याख्यान श्रृंखला” के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर अनेक अलग-अलग व्याख्यान नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे, जो छात्रों, शोधकर्ताओं एवं फैकल्टी सदस्यों के लिए निरंतर ज्ञानवर्धक और प्रेरणास्रोत सिद्ध होंगे।

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