फरवरी में अचानक बढ़ती गर्मी और सिमटता हुआ बसंत

 प्रो आर एस सेंगर

मेरठ: मौसम मैं अचानक बड़ी तेजी के साथ बदलाव हो रहा है अभी फरवरी का ही महीना चल रहा है और धूप इतनी तेज होने लगी है कि लोगों के स्वेटर जैकेट सभी दो दिन में ही उतर चुके हैं क्या यह स्थिति दीर्घकालिक जलवायु प्रवृत्ति के संकेत हैं ऐसा माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में अचानक वृद्धि हो रही है।      उत्तर भारत में इस वर्ष फरवरी का महीना अप्रत्याशित गर्मी लेकर आ चुका है कई शहरों में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और लोगों को ऐसा महसूस हो रहा है कि सर्दी के बाद सीधे ही मई के महीने का मौसम महसूस होने लगा है जिस समय फागुन की हल्की गर्मी और रात की ठंडक वसंत को सुखद बनती थी अब इस समय तेज धूप और शुष्क हवाएं परेशान कर रही है भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार फरवरी में तापमान सामान से अधिक दर्ज हो रहा है यह केवल अस्थाई बदलाव नहीं बल्कि दीर्घकालिक जलवायु प्रवृत्ति का संकेत है वैश्विक स्तर पर बढ़ती गर्मी और ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

 औद्योगीकरण वाहनों की संख्या जंगलों की कटाई और शहरी हिट आयरलैंड प्रभाव में तापमान बढ़ने से ऐसा परिवर्तन हो रहा है इस बदलते मौसम का असर प्रकृति और कृषि पर श दिखाई देने लगा है सरसों के फूल जल्दी झड़ रहे हैं फैसले समय से पहले पकाने को तैयार हो रही है और गेहूं जैसी रवि फसलों की उपज पर खतरा बढ़ रहा है मिट्टी की नमी तेजी से घटना के कारण सिंचाई की मांग भी बढ़ सकती है स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है यदि फरवरी में ही गर्मी बढ़ती रही तो हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है सिमिट्टा बसंत चेतावनी है की प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है।

 जब बसंत कल चला था तो काफी लोगों में खुशहाली महसूस की जाती थी और तापमान भी अनुकूल रहने के कारण खेत भी अच्छे दिखाई देते थे लेकिन अचानक समझते बसंत केवल मौसम के बदलाव का नहीं बल्कि चेतावनी की एक प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में ऋतुओं की पहचान धुंधली हो सकती है। 

 इसलिए हम सभी लोगों का कर्तव्य है कि प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ना करें इको फ्रेंडली चीजों को बढ़ावा दें तथा पर्यावरण पर होने वाले नुकसान से बचने के लिए ऐसे उपाय बनाएं जिससे कि हमारा पर्यावरण कम से काम प्रभावित हो नहीं तो आने वाले समय में हम बढ़ती गर्मी से काफी परेशान हो जाएंगे इसलिए सभी लोगों को प्रयास करना होगा कि वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक वैचारिक क्रांति लाएं जिससे प्रत्येक व्यक्ति इस और ध्यान दें और अपना योगदान देकर पर्यावरण फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण लगाकर उनको समृद्धि करने का संकल्प ले। 

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