कुलपति  ने किया छात्रावासों का औचक निरीक्षण

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर स्थित छात्रावासों में आज सुबह उस समय खास हलचल देखने को मिली जब कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने औचक निरीक्षण किया।उनके साथ मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रोफेसर दिनेश कुमार, कुलानुशासन अधीक्षक प्रोफेसर वीरपाल सिंह सहित विभिन्न छात्रावासों के वार्डन उपस्थित रहे। कुलपति के अचानक पहुंचने से छात्रावासों की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई और सुधार की दिशा में त्वरित कदम उठाए गए।

कुलपति सबसे पहले केपी-हॉस्टल पहुंचीं, जहां उन्होंने नाश्ता कर रहे छात्रों से आत्मीय संवाद किया और भोजन की गुणवत्ता स्वयं परखी। उन्होंने छात्रों से साफ-सफाई, भोजन, अध्ययन वातावरण और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर बातचीत की तथा मौके पर मौजूद अधिकारियों को समस्याओं के समाधान हेतु तुरंत निर्देशित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और नियमित अध्ययन से ही उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जा सकती है।

इसके बाद कुलपति क्रमशः आर के-हॉस्टल, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हॉस्टल और पंडित दीनदयाल उपाध्याय छात्रावास पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कमरों, शौचालयों, स्टडी रूम, पेयजल व्यवस्था और सामान्य सुविधाओं का  अवलोकन किया। जहां कहीं भी कमी नजर आई, वहां संबंधित छात्रावास अधीक्षकों,अभियंताओं और अधिकारियों को तत्काल सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए गए, ताकि छात्रों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिल सके।डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हॉस्टल के किचन में पहुंचकर कुलपति ने भोजन निर्माण की पूरी प्रक्रिया देखी । उन्होंने वार्डनों से कहा कि किसी भी छात्र को भोजन, इंफ्रास्ट्रक्चर या साफ-सफाई से जुड़ी समस्या न हो और यदि कोई शिकायत मिले तो उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर तत्काल किया जाए।

निरीक्षण के दौरान कुलपति ने छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों से जुड़ने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शाम के समय विश्वविद्यालय के खेल परिसर में जाकर विभिन्न खेलों में भाग लेने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी मजबूत होता है, जो अध्ययन में सकारात्मक प्रभाव डालता है। छात्रों को यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय द्वारा एक सेंट्रलाइज्ड ई-मेल आईडी जारी की गई है, जिस पर वे अपनी समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्र चाहें तो अपने वार्डन के माध्यम से या सीधे विश्वविद्यालय प्रशासन को भी अपनी बात पहुंचा सकते हैं।

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