बच्चियां छोटे कपड़ों में गंदी रील बना रहीं'- साध्वी प्राची 

 मेरठ। ‘आजकल बच्चियां छोटे-छोटे कपड़ों में रील बना रही हैं। इससे लोगों के बीच गलत मैसेज जा रहा है। मैं बच्चियों से कहना चाहती हूं कि छोटे कपड़े पहनकर गंदी रील न बनाएं।’यह बात मेरठ में VHP नेता साध्वी प्राची ने रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि आजकल लोग अपनी बच्चियों को कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। बाद में जब वे ससुराल जाती हैं, तो नीले ड्रम की धमकी देती हैं। कॉन्वेंट की शिक्षा ही ‘नीला ड्रम’ है।

साध्वी प्राची ने कहा- आज के समय में अगर हमें सुरक्षित रहना है, तो एकजुट रहना होगा। साथ ही अपने धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पिछले 100 साल से हर क्षेत्र में सक्रिय है। अब संघ हर घर तक पहुंच चुका है।इसी वजह सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं। शिक्षा से लेकर अन्य सभी क्षेत्रों में संघ लगातार आगे रहा है। इसके बावजूद कुछ लोग संघ का विरोध कर रहे हैं। उन्हें संगठन से खतरा महसूस हो रहा है। ऐसे लोगों के न तो काम नेक हैं और न ही उनके बाप एक हैं।

छोटे कपड़े पहनकर बेटियां गंदी रील बना रहीं

आज के दौर में सोशल मीडिया पर रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। मैं बेटियों से अनुरोध करती हूं कि वे छोटे कपड़े पहनकर गंदी रील न बनाएं। ऐसी रील बनाएं, जिससे उनके पिता की इज्जत पर आंच न आए। रील ऐसी होनी चाहिए, जिसे देखकर पिता गर्व से कह सकें कि वीडियो में उसकी बेटी है।

लव जिहाद को लेकर कहा कि कुछ लोग कलावा पहनकर चमचमाती बाइक पर आते हैं। अपना नाम हैप्पी, पप्पू, कल्लू बताकर लोगों को अपनी बातों में फंसाने का काम करते हैं।

कॉन्वेंट की शिक्षा में नीला ड्रम है

मेरे एक कार्यक्रम के दौरान नीले ड्रम का भी जिक्र आया था। मैं साफ कहना चाहूंगी कि इस तरह के संस्कार बच्चों में कॉन्वेंट शिक्षा से आ रहे हैं। बच्चियां पढ़कर जब ससुराल जाती हैं, तो नीले ड्रम दिखाकर डराती हैं।हम सरस्वती शिशु मंदिर और गुरुकुल में पढ़े हैं, जहां संस्कार दिए जाते हैं। आज हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे, उन्हें छोड़ रहे हैं। इसी वजह से आजकल के बच्चों में इस तरह के विचार आ रहे हैं और ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

प्राची ने पहले कहा था- देश को आजादी तकली-चरखे से नहीं मिली

इससे पहले 25 दिसंबर को अलीगढ़ में साध्वी प्राची ने कहा था कि देश को आजादी तकली और चरखे से नहीं मिली। भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली है। इसके बावजूद चरखे वालों को राष्ट्रपिता घोषित कर दिया गया। इतिहास से तकली और चरखे वाली कहावत को उखाड़ फेंकना चाहिए। अगर किसी को राष्ट्रपिता कहना ही है तो सरहिंद की दीवारों से पूछा जाना चाहिए कि बलिदान क्या होता है? उन्होंने गुरु गोविंद सिंह को राष्ट्रपिता घोषित किए जाने की मांग की थी।

कहा था- 4 बॉयफ्रेंड रखने पर घर नहीं बसेगा

करीब 6 महीने पहले मुजफ्फरनगर में साध्वी प्राची ने कहा था- जो लड़कियां 4-4 बॉयफ्रेंड रखती हैं, वे कभी घर नहीं बसा सकतीं। हमारी संस्कृति में पति को परमेश्वर माना जाता है। लेकिन, आज की लड़कियां बॉयफ्रेंड बनाने को फैशन समझ रही हैं। ये फैशन ही आज की लड़कियों को मुस्कान और सोनम रघुवंशी जैसा बना रहा है। मेरठ का सौरभ हत्याकांड और इंदौर का राजा रघुवंशी हत्याकांड इसी का नतीजा है। जहां गैर मर्दों के चक्कर में पत्नियों ने अपने ही पति को मौत के घाट उतार दिया।


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