सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दुकानदारों ने खाली करनी शुरू की दुकानें 

13 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई, वास्तुनियोजन कार्यालय मेरठ शिफ्ट 

 अवैध निर्माणों को अधिकारी करेंगे चिन्हित 

 मेरठ।  सुप्रीम कोर्ट में इस 13 मार्च की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। शीर्ष अदालत ने 27 जनवरी को छह सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद अब व्यापारी धीरे-धीरे अपनी दुकानें खाली करने लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवनों में बने कॉम्प्लेक्स और वहां संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर निर्माण ध्वस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। आदेश की समय-सीमा नजदीक आते ही बाजार में असमंजस का माहौल साफ नजर आ रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

व्यापारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल पा रहा है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी इस मामले में सामने आने से बचते दिख रहे हैं। शनिवार को कई दुकानदारों ने संभावित कार्रवाई से पहले स्वयं ही दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण हटाने शुरू कर दिए। इस दौरान टिन शेड, अस्थायी ढांचे और अन्य स्ट्रक्चर हटाए गए।

इस बीच, आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी केवल अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश स्पष्ट हैं। खुराना ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर व्यापारियों को भ्रमित किया जा रहा है।

लोकेश खुराना ने बताया कि नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत भी ऐसे अवैध निर्माणों को कोई राहत नहीं दी जा सकती। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से बाजार में गतिविधियां प्रभावित रहीं और ग्राहकों की आवाजाही भी कम रही।

 वास्तुकला नियोजन ने विधिवत रूप से मेरठ में कार्य करना किया आरंभ 

 अभी लखनऊ में स्थापित वास्तु नियोजन कार्यालय की ईकाई- 2 कार्यालय को मेरठ शिफ्ट कर दिया गया है। सोमवार से विभाग ने अपना कार्य आरंभ कर दिया है। नियोजन अधिकारी अवैध निर्माणों को चिन्हित करेंगे । इसके बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लायी जाएगी। अपर आवास  आयुक्त एंव सचिव नीरज शुक्ल ने तीन दिन में कार्यालय को मेरठ में शिफ्ट होने के  निर्देश  दिये थे। जिस पर अमल किया जा रहा है। 

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