" नींदिया रानी "
ये नींदिया रानी !
कभी तो मेरे पास आ
इन आँखों में आकर समा जा
कितनी तलब है इन आँखों को तेरी
तू गुम हो गई है नैनों से मेरी
छाई है आँखों में उदासी कितनी
कि हर पल करता है ख्वाहिशें तेरी
देख निशा ने भी ओढ़ लिया है आँचल घनेरी
हे नींदिया रानी ! कभी मेरे भी तू पास आ
और इन आँखों में आकर तो समा जा ।
हर रात रोती हैं ये आँखें मेरी
हर रात होती है ख्वाहिशें तेरी
आकर पलकों में समा जा
और ले चल, ले चल मुझको सुनहरे सपनों की ओर
इससे पहले कि रात बीत जाये और हो भोर
हे नींदिया रानी ! कभी मेरे भी तो पास आ
इन आँखों में तो समा जा।
यादों की उन छड़ी से
कुछ पल के लिए मुझको तू दे आराम
थक गए है ये नैन मेरे
और थक गई है ये राते
अब तो तू आ ही जा
कुछ पल के लिए
मुझको अपना बना भी जा
हे निंदिया रानी ! कभी मेरे भी तू पास आ
और इन आँखों में समा जा ।
-------------------------
- शीतल, छत्तीसगढ़।



No comments:
Post a Comment