दोबारा कॉल नहीं करते तो नहीं फंसते एसपी सिटी के फंदे में
-दोनों दरोगाओं की शिनाख्त के लिए कई थानों के दरोगाओं की देखी गई थी सर्विस बुक
-पीड़ित कारोबारी ने फोटो देखकर दोनों दरोगाओं की पहचान की थी, फिर फंसे जाल में
मेरठ। 20 लाख रुपये देने के बाद कारोबारी दहशत में आकर चुप बैठ गए थे, लेकिन दोनों दरोगाओं के मुंह भ्रष्टाचार को खून लगा चुका था। दोबारा दस लाख की मांग के लिए जैसे ही एक दरोगा ने वाट्सएप काल की तो चार दिन की जांच में ही दोनों दरोगा एसपी सिटी की फंदे में फंस गए। दोनों की पहचान के लिए काफी मशक्कत भी एसपी सिटी को करनी पड़ी थी, क्योंकि पीड़ित कारोबारी दोनों दरोगाओं की पहचान भय के कारण मन मस्तिष्क से मिट चुकी थी। लिहाजा विभाग में पनपे भ्रष्टाचार के कीड़े को खत्म करने के लिए एसपी सिटी ने कई थानों में तैनात नए दरोगाओं की सर्विस बुक मांग कर पहचान कराई तो लोहिया नगर थाने में तैनात दोनों दरोगाओं की फोटो देखकर पीड़ित ने पहचान कर ली। अधिकारियों का फंदा कसता देखकर रातों-रात दोनों दरोगा पीड़ित कारोबारी को 15 लाख रुपये देकर फरार हो गए। दोनों की तलाश में स्वाट टीम दबिश दे रही है और दोनों के बारे में बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट भाग गए हैं।
ऐसे फंसे फंदे में रंगदारी वसूलने वाले दरोगा
नौ दिसंबर को दोनों दरोगाओं को 20 लाख रुपये देने के बाद धागा कारोबारी राशिक और उनके भाई रागिब भय के कारण शांत बैठ गए थे, लेकिन दोनों दरोगाओं के मुंह भ्रष्टाचार का खून लग चुका था। लिहाजा कारोबारी से दस लाख की वसूली के लिए 21 जनवरी को दारोगा लोकेंद्र साहू ने राशिक को वाट्सएप पर काल की थी। सात दिन पहले पीड़ित कारोबारी ने इसकी शिकायत एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह से की थी, जो नंबर कोराबारी ने दरोगा का दिया था वह किसी और के नाम था और वाट्सएप पर फोटो भी नहीं था।
जांच के दौरान एसपी सिटी ने गोपनीय तरीके से कई नई उम्र के दरोगाओं को तलब किया था, लेकिन कारोबारी पहचान नहीं कर पाए थे। मामले में पेंच फंसता देखकर एसपी सिटी ने कोतवाली सर्किल के थानों में तैनात नए दरोगाओं की सर्विस बुक मंगाई थी। सर्विस बुक में दरोगाओं की लगी फोटो के आधार कारोबारी ने दोनों आरोपी दरोगा की पहचान की। इसके बाद एसपी सिटी ने घटना वाले दिन की दोनों दरोगाओं की मोबाइल की सीडीआर खंगाली तो वह कारोबारी द्वारा दी गई जानकारी से तालमेल खा गई। इसके बाद एसपी सिटी ने अपनी जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी और एसएसपी ने दोनों दरोगाओं के साथ-साथ लोहिया नगर इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया। इस तरह के मामलों में समय तो लगता है, जब पीड़ित पुलिस के सहयोग में देरी करता है। ऐसा ही इसी मामले में हुआ। अगर समय रहते कोराबारी पुलिस अधिकारियों को जानकारी दे देता तो आरोपी पुलिस की गिरफ्त से नहीं भागते।
एएसपी ने पीड़ित के साथ पांच घंटे तक क्राइम सीन देखा
धागा कारोबारी को कई घंटे तक बंधक बनाकर वसूली करने के मामले में सस्पेंड हुए दोनों दरोगाओं पर कानूनी शिकंजा कसने की पुलिस अधिकारियों ने तैयारी कर ली है। नए बैच के दरोगाओं की इस करतूत से विभाग के अधिकारी की पेशानी पर बल पड़े हुए है। दोनों दरोगाओं पर कानूनी घेराबंदी के लिए मंगलवार को एएसपी एवं सीओ कोतवाली अंतरिक्ष जैन ने पीड़ित कारोबारी के साथ क्राइम सीन देखा और इस दौरान आरोपी दरोगा कार से कारोबारी को जहां-जहां लेकर गए थे, वहां जाकर एएसपी ने घटना का भौतिक सत्यापन किया और वीडियोग्राफी भी कराई।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया, मुकदमा दर्ज होने के बाद पूरे मामले की जांच की जाती है। इसी कड़ी में मंगलवार को पीड़ित कारोबारी को जांच के लिए एएसपी एवं सीओ सिटी अंतरिक्ष जैन ने बुलाकर पूछताछ की थी। इसके बाद एएसपी पीड़ित कारोबारी को उन-उन स्थानों पर ले गए थे, जहां-जहां कारोबारी को आरोपी दरोगा लेकर गए थे। इस दौरान एएसपी ने वीडियोग्राफी भी कराई और आरोपी दरोगा, पीड़ित कारोबारी, उनके भाई और रिश्तेदार के मोबाइल की सीडीआर भी उठाई थी, ताकि आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके। क्राइम सीन को दोहराने के दौरान पाया गया है कि पीड़ित ने जो-जो स्थान पुलिस को बताए थे, उन स्थानों पर आरोपी दरोगाओं की मोबाइल की लोकेशन मिली है।


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