एनएचएम की योजनाओं पर बजट का ग्रहण

 दाे माह से वेतन ने मिलने से स्वास्थ्य कर्मियों पर छाया आर्थिक संकट 

 मेरठ।  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की योजनाओं पर बजट का संकट गहरा गया है।इसका सीधा प्रभाव स्वास्स्थ्य सेवाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा  असर   एनएचएम में कार्य कर रहे संविदा व आऊट सोर्सिग  कर्मचारियों पर पड़ रहा है। दो माह से वेतन न मिलने से कार्य प्रभावित हो रहा है। 

 मेरठ जिले में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत  1126 संविदा कर्मचारी व 350 आऊट सोर्सिग कर्मचारी है। एनएचएम की और से प्रति वर्ष स्वास्थ्य विभाग को 166.58 करोड़  बजट मिलता है। स्वास्थ्य विभग के अधिकारियों के अनुसार पिछले से अप्रैल माह में मिलने वाले बजट में से 78.11 करोड़ रूपये गत 24 जनवरी को आया  है। जिसमें से कर्मचारियों का वेतन व सीएचसी पर खर्च हो गया। लेकिन भी काफी संख्या में ऐसे स्वास्थ्य कर्मी है। जिन्हें दो माह से वेतन नहीं मिल पाया है। कर्मचारी लगातार सीएमओ डा. अशोक कटारिया से इस बारे में बात कर चुके है। लेकिन उनका भी यही कहना है कि बजट के शासन को कई बार पत्रााचार किया जा चुका है। वहीं से पैसा आने के बाद वेतन  का भुगतान किया जाएगा।  वेतन न मिलने  से कर्मचारियों को परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों का कहना है । वेतन न मिलने बच्चो की पढ़ाई व लोन की किश्त रूक गयी है। स्कूल से फीस भरने के लिए लगातार नोटिस आ रहे है। आखिरकार कब तक किस से उधार ले । उधार भी तो चुकाना है।  

 बजट की कमी के चलते गर्भवती महिलाओं की जांच से लेकर टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण

 रोगी कल्याण समिति में धन न होने से आवश्यक दवाएं और सामग्री भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वेंडरों के लाखों रुपये का भुगतान बकाया होने के कारण उन्होंने सामान की आपूर्ति बंद कर दी है।

नहीं बन रहे ई वाउचर, निजी केंद्रों से जांच करवाने को मजबूर गर्भवतियां

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए हर माह एक, नौ, 16 और 24 तारीख को लगने वाले सत्रों में ई वाउचर जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। छह माह से बजट के अभाव में यह ई वाउचर प्रणाली बंद है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। 

पोषण के बजट को हो गई पांच माह से बंद है। टीबी, कमजोर हो रहे मरीज

  सरकार की ओर से टीबी मरीजों को एक हजार रूपये की राशि हर माह उपलब्ध करायी जाती है।  इसका उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है। , लेकिन खाते में पोषण भत्ते की रकम न आने से गरीब मरीज परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि टीबी का इलाज लंबा चलता है और इस दौरान नियमित पोषण बहुत आवश्यक है। पोर्टल की समस्या भी राशि अटकने का एक कारण है।अब सीएचसी पर सूचर, नीडल, बीपी ब्लेड और ड्रेसिंग जैसी आवश्यक सामग्री तक उपलब्ध नहीं है। मरीजों को बाहर से सामान खरीदना पड़ रहा है या निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। 

 किराये बिल्डिंग में चल रहे हैल्थ सैंटर 

  मेरठ जिले में अधिकारी स्वास्थ्य केन्द्र किराये की बिल्डिंग में चल रहे है। किराया न मिलने पर मकान मालिकों ने  खाली करने के नाेटिस भेजने आरंभ कर दिये है। 

 भुंगतान न होने से वेंडरों ने खीचें हाथ 

 स्वास्थ्य विभाग में प्रचार प्रसार का बडे  पैमाने पर कार्य होती है। विभाग की योजनाओं व अन्य कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के लिए लाखो की संख्या में पोस्टर व बैनर लगाए जाते है। वेंडर ठेकेदारों के बिल अटकने से उन्होंने कार्य बंद कर दिया है। उनका कहना है  भुगतान न होने के कारण वह भी पोस्टर व बैनर बनाने के लिए मजबूर है। 

  बोले अधिकारी 

जिला एकाउंट मैनेजर शिव महेन्द गौतम का कहना है। जो शासन की ओर से पैसा आया है। उसमें से वेंडरों का भुगतान किया जा रहा है। अन्य का भुगतान पैसा आने के बाद कर दिया जाएगा । 

 इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डा.अशोक कटारिया का कहना है जनवरी माह में कुछ बजट आया है। ्र भुूगतान किया जा रहा है। अन्य भुूगतान के लिए शासन काे लिखा गया है। जैसे ही भुगतान आएगा । कर्मचारियों का भुगतान कर दिया जाएगा । 

  


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