एनसीआरटी की 8 वीं की क्लास की बुक में अदालत का भष्टाचार शामिल करने पर भड़के सीजेआई
बाेले - किसी भी संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे
नयी दिल्ली। एनसीआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भष्टाचार का शामिल करने पर विवाद हो गया है। सीजेआई इस पर भड़क गये है। उन्होंने कहा है किसी भी संस्था को बदमान करने की अनुमति नहीं है। उन्हें पता है इससे कैसे निपटना है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने एनसीआरटी की उस पुस्तक का संज्ञान लिया है, जिसमें कक्षा 8 के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे किसी को भी इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे स्वतः संज्ञान लेंगे। सीजेआई ने कहा, यह एक सोची-समझी कार्रवाई प्रतीत होती है।
किताब में हुए बदलाव पर सांसद कपिल सिब्बल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एनसीआरटी8वीं क्लास के बच्चों को भ्रष्ट ज्यूडिशियरी सिस्टम के बारे में बता रहा है।
क्या है पूरा मामला?
एनसीआरटी ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की है. किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया है. बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।
किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है।
चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं. गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है. भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।
करप्शन का जिक्र करते हुए बुक में लिखा है ज्यूडिशियरी के सदस्यों के खिलाफ शिकायतें सेंट्रलाइज़्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए फाइल की जा सकती हैं। किताब के मुताबिक, 2017 और 2021 के बीच इस सिस्टम के जरिए 1,600 से ज़्यादा शिकायतें मिलीं।
शिकायतों पर सरकार ने क्या कहा?
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 13 फरवरी, 2026) को लोकसभा को बताया था कि पिछले दस सालों में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के ऑफिस को मौजूदा जजों के खिलाफ 8,630 शिकायतें मिलीं। उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 2016 और 2025 के बीच जजों के खिलाफ 8,360 शिकायतें दर्ज की गईं।
मंत्री द्वारा शेयर की गई टेबल के अनुसार, सीजेआई के ऑफिस को 2016 में जजों के खिलाफ 729 शिकायतें मिलीं। इसके बाद 2017 में 682, 2018 में 717 और 2019 में 1,037 शिकायतें मिलीं। 2020 और 2021 में, ऐसी शिकायतें क्रमशः 518 और 686 थीं. 2022 में 1012 शिकायतें मिलीं। इसके बाद 2023 में 977, 2024 में 1,170 और 2025 में 1,102 शिकायतें मिलीं।


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