नमो भारत क्रांति धरा मेरठ से 2027 का शंखनाद

-​सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

​मेरठ की ऐतिहासिक और क्रांतिकारी धरा एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करवाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत ट्रेन का 22 फरवरीउद्घाटन करने आने वाले है। उनका, सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक साथ मेरठ की धरती पर आगमन महज एक प्रशासनिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति के कैनवास पर खिंची गई एक युगांतरकारी लकीर बनने वाली है। भारत और हिंदुत्व के ये तीन स्तंभ राम मंदिर के गौरवमयी उत्सव और प्राण-प्रतिष्ठा के आध्यात्मिक ज्वार के बाद मेरठ शहर में 20, 21 व 22 फरवरी को होंगे। इससे पूरे राष्ट्र को स्पष्ट संदेश जाएगा कि यह सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विकास का अभूतपूर्व महा-संगम है। 

22 फरवरी 2026 को नमो भारत कॉरिडोर के पूर्ण परिचालन के साथ होने वाला यह आयोजन, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की राजनैतिक बिसात का सबसे शक्तिशाली शंखनाद भी माना जाना चाहिए।

​प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विकास के एक नए युग का द्वार खोलने वाला है। 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर का पूर्ण परिचालन केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारा है। अब दिल्ली से मेरठ का सफर मात्र 50-55 मिनट में सिमट जाएगा, तो यह केवल समय की बचत नहीं होगी, बल्कि मेरठ के युवाओं के लिए दिल्ली-एनसीआर के अवसरों के द्वार खोल देगा। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक तकदीर बदलने वाला सराहनीय कदम सिद्ध होगा।

​मेरठ मेट्रो देश की पहली ऐसी अनूठी प्रणाली बनने जा रही है जो रैपिड रेल के साथ एक ही ट्रैक साझा करेगी। सराय काले खां से मोदीपुरम तक का यह निर्बाध सफर न केवल संपर्क (कनेक्टिविटी) को वैश्विक स्तर पर ले जाएगा, बल्कि एनसीआर के दायरे को व्यावहारिक रूप से भी विस्तारित करेगा। यह बुनियादी ढांचा सीधे तौर पर आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाने वाला है, जिससे मोदी की गारंटी और योगी के सुशासन पर जनता का अटूट विश्वास और अधिक प्रगाढ़ होगा।

दूसरी ओर मेरठ में ​त्रिमूर्ति का एक साथ होना के गहरे राजनैतिक और सामाजिक मायने भी रखता है। ​इस भव्य आयोजन के पीछे छिपे रणनीतिक संकेतों का विश्लेषण करना अनिवार्य है। मेरठ, जो 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति का केंद्र रहा है, आज फिर से एक वैचारिक क्रांति का गवाह बन रहा है। 

राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद यह पहला ऐसा बड़ा सार्वजनिक मंच है जहां सांस्कृतिक पुनरुत्थान और आधुनिक संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) एक साथ दिखेंगे। यह भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जहां वे विकास (नमो भारत) को विरासत (सांस्कृतिक चेतना) के साथ जोड़कर संतुलित करते हैं।

​दो दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति संगठन की शक्ति का प्रतीक है, तो पीएम मोदी और सीएम योगी सरकार की सफलता का चेहरा हैं। यूजीसी विवाद और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष द्वारा घेराबंदी की कोशिशों के बीच, यह एकजुटता न केवल विपक्ष के हौसले पस्त करेगी, बल्कि भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार करेगी।

​मेरठ और आसपास का क्षेत्र पारंपरिक रूप से किसान राजनीति और जटिल जातीय समीकरणों के लिए जाना जाता है। यहां से विकास की रफ्तार का संदेश देकर यह तिकड़ी विपक्ष के जातिगत जनगणना और क्षेत्रीय गठबंधनों के एजेंडे को राष्ट्रवाद और अंत्योदय के एक साझा छत्र के नीचे लाने का प्रयास करेगी।

​​वर्तमान राजनैतिक माहौल में जहां विपक्ष अक्सर विकास कार्यों को नकारने या उन्हें जातीय विवादों में उलझाने का प्रयास करता है, वहां मोदी-भागवत-योगी की त्रिमूर्ति एक ऐसी दीवार की तरह खड़ी है जिसे भेदना विपक्षी रणनीतिकारों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। जब बुनियादी ढांचा और धर्म के सूत्र एक साथ पिरोए जाते हैं, तो विपक्ष का पारंपरिक वोट बैंक बचाना चेक मेट की चुनौती जैसा है। मेरठ की यह सभा स्पष्ट करने वाली है कि भाजपा सुशासन को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे नमो भारत जैसी परियोजनाओं के माध्यम से धरातल पर उतारकर जनता को अनुभव कराती है।

यह सभा ​2027 की बिसात पर निर्णायक शंखनाद होगी। मेरठ की क्रांतिकारी मिट्टी से उठने वाली गूंज बता रही है कि भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपना अभेद्य किला तैयार कर लिया है। यह केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उस जीत का संकल्प है जिसकी तैयारी वर्षों पहले से प्रारंभ हो चुकी थी। मोदी की वैश्विक लोकप्रियता, योगी का कठोर और निष्पक्ष शासन, और संघ का सूक्ष्म जमीनी प्रबंध यह समन्वय भाजपा को एक ऐसा रक्षा कवच प्रदान करता है, जिसके सामने विपक्ष के तमाम जातिगत और क्षेत्रीय दांव फीके नजर आते हैं।

​​अंततः, मेरठ की यह ऐतिहासिक सभा विकास और राष्ट्रवाद के उस संगम का प्रतीक बनेगी, जो आने वाले दशकों के लिए भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगी। नमो भारत की तेज रफ्तार केवल ट्रेनों की गति नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते भाग्य और बदलते स्वरूप की गति है। प्रधानमंत्री मोदी, मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ का एक साथ आना यह सुनिश्चित करता है कि 2027 का चुनावी रण भी केवल सत्ता का खेल नहीं होगा, बल्कि यह सांस्कृतिक चेतना और चहुंमुखी विकास की निरंतरता का उत्सव होगा जो आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में एक स्वर्णिम मील का पत्थर सिद्ध होगा।



No comments:

Post a Comment

Popular Posts