हार्ट सर्जरी में क्या बेहतर है मिनिमली इनवेसिव या ओपन तरीका
मेरठ: जब किसी व्यक्ति को हार्ट सर्जरी की जरूरत बताई जाती है, तो डर होना स्वाभाविक है। अधिकतर मरीजों को दर्द, लंबे रिकवरी पीरियड या फिर सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में वापसी को लेकर चिंता रहती है। आजकल “मिनिमली इनवेसिव” हार्ट सर्जरी के बारे में भी लोग सुनते हैं और यह सोचने लगते हैं कि क्या यह पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी से ज्यादा सुरक्षित है। दोनों के बीच अंतर को समझना मरीजों और उनके परिवारों के डर और कन्फ्यूजन को काफी हद तक कम कर सकता है।
ओपन हार्ट सर्जरी एक पारंपरिक और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। इसमें डॉक्टर छाती के बीच में चीरा लगाकर सीधे दिल तक पहुंचते हैं। यह तरीका कई दशकों से सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है और लाखों जिंदगियां बचा चुका है। इस प्रक्रिया में सर्जन को दिल साफ़ तौर पर दिखाई देता है, जिससे ब्लॉकेज, हार्ट वाल्व की खराबी या एक साथ कई हार्ट प्रॉब्लम्स का सुरक्षित इलाज संभव होता है। जटिल मामलों में आज भी ओपन हार्ट सर्जरी को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के सी.टी.वी.एस. विभाग के सीनियर डायरेक्टर, डॉ. वैभव मिश्रा, ने बताया “मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी में छाती के साइड में छोटे-छोटे कट लगाए जाते हैं और ब्रेस्टबोन को नहीं खोला जाता। खास इंस्ट्रूमेंट्स और कैमरे की मदद से डॉक्टर इन छोटे कट्स के जरिए सर्जरी करते हैं। चूंकि कट छोटा होता है, इसलिए मरीजों को आमतौर पर कम दर्द, कम ब्लड लॉस और जल्दी भरने वाले घाव का फायदा मिलता है। कई मरीज पारंपरिक सर्जरी की तुलना में जल्दी चलने-फिरने लगते हैं और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी जल्दी लौट पाते हैं। मरीजों को सबसे बड़ा फर्क कट के साइज और रिकवरी की स्पीड में नजर आता है। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में दाग छोटा होता है और अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल सकती है, जबकि ओपन हार्ट सर्जरी में कट बड़ा होता है और रिकवरी थोड़ा ज्यादा समय ले सकती है।“
लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि छोटा कट हमेशा बेहतर सर्जरी का मतलब नहीं होता। हार्ट सर्जरी का मुख्य उद्देश्य समस्या को पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से ठीक करना होता है। अगर बीमारी ज्यादा कॉम्प्लेक्स है, तो ओपन हार्ट सर्जरी ही बेहतर और सुरक्षित विकल्प हो सकती है।
डॉ. वैभव ने आगे बताया “हर मरीज इस तकनीक के लिए उपयुक्त नहीं होता। जिन मरीजों में गंभीर हार्ट डिजीज, कई ब्लॉकेज, फेफड़ों की कमजोरी, पहले हार्ट सर्जरी हो चुकी हो या इमरजेंसी कंडीशन हो, उनके लिए यह तरीका सही नहीं हो सकता। डॉक्टर मरीज की उम्र, ओवरऑल हेल्थ, हार्ट की स्थिति और टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर सही तरीका तय करते हैं। नया या ज्यादा प्रचारित तरीका चुनने से ज्यादा जरूरी है कि मरीज के लिए सही और सुरक्षित तरीका चुना जाए। मरीजों को डर, सुनी-सुनाई बातों या सिर्फ कॉस्मेटिक कारणों के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। हार्ट सर्जन से खुलकर बात करें, सवाल पूछें और समझें कि किसी खास तरीके की सलाह क्यों दी जा रही है। एक अच्छा डॉक्टर हमेशा वही तरीका सुझाता है जिससे मरीज को लंबे समय में सबसे बेहतर और सुरक्षित नतीजा मिले, भले ही उसमें बड़ा चीरा ही क्यों न लगाना पड़े।“
ओपन हार्ट सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी—दोनों ही जान बचाने वाली प्रक्रियाएं हैं। हर मरीज के लिए एक ही तरीका सबसे अच्छा हो, यह जरूरी नहीं है। सबसे अच्छी सर्जरी वही है जो सुरक्षित हो, प्रभावी हो और मरीज की स्थिति के अनुसार सही हो।
आज आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं और अनुभवी डॉक्टरों की वजह से हार्ट सर्जरी पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। मरीजों को पूरे भरोसे के साथ अपनी रिकवरी और स्वस्थ भविष्य पर ध्यान देना चाहिए, यह जानते हुए कि उनके दिल के लिए सही फैसला लिया गया है।


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