शिक्षक और नई शिक्षा नीति

राजीव त्यागी 
शिक्षा किसी भी जीवंत राष्ट्र की वह नींव होती है जिस पर उसकी प्रगति का भव्य महल खड़ा होता है। भारत ने वर्ष 2020 में अपनी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरियेे इसी नींव को आधुनिक, लचीला और वैश्विक बनाने का संकल्प लिया है। अक्सर चर्चाएं केवल छात्रों के पाठ्यक्रम और परीक्षा के पैटर्न पर सिमटकर रह जाती हैं, लेकिन इस महायोजना के केंद्र में सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ शिक्षक है। 


यह नीति इस सत्य को स्वीकार करती है कि कोई भी सुधार तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसे लागू करने वाला शिक्षक सशक्त, संतुष्ट और सम्मानित महसूस न करे। नई शिक्षा नीति का मानना है कि शिक्षक की ऊर्जा का निवेश केवल फाइलों में नहीं, बल्कि छात्रों के मस्तिष्क में कौतूहल पैदा करने में होना चाहिए। यह बदलाव शिक्षकों को वह रचनात्मक आजादी देगा, जिसकी वे दशकों से प्रतीक्षा कर रहे थे।



 अब वे कक्षा में सिर्फ एक तय पुस्तक तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मौलिक नए प्रयोग करेंगे।भारतीय संस्कृति में अनुभव को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। एनईपी 2020 इसी परंपरा को ‘नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग’ के माध्यम से पुनर्जीवित कर रही है।  नयी शिक्षा नीति के तहत अब शिक्षक को केवल निर्देशों का पालन करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाला नेतृत्वकर्ता मान रहे हैं। ‘360-डिग्री समग्र प्रगति कार्ड’ की शुरुआत इसी विश्वास का प्रमाण है। अब छात्र के भविष्य का फैसला केवल मशीन से जांची गई शीट नहीं करेगी, बल्कि शिक्षक का वह सूक्ष्म अवलोकन करेगा जिसने बच्चे के मूल्यों और कौशल को करीब से देखा है। 

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