भारत–यूएई मित्रता की विराट उड़ान


- प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
दिल्ली की सर्द सुबह 19 जनवरी 2026 को इतिहास की गर्म सांसों से भर उठी, जब पालम वायुसेना अड्डे पर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का विमान उतरा। यह केवल एक राजकीय आगमन नहीं था, बल्कि भरोसे, आत्मीयता और साझा भविष्य का प्रतीक क्षण था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिकताओं की सीमाएं तोड़ते हुए स्वयं आगे बढ़कर अपने मित्र का स्वागत किया। दोनों नेताओं का आलिंगन कैमरों से कहीं आगे जाकर दिलों में उतर गया। उस क्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह यात्रा कागजी समझौतों की नहीं, बल्कि विश्वास की ठोस इमारत खड़ी करने की है, जो आने वाले समय की दिशा तय करेगी।

मात्र दो से तीन घंटे की इस संक्षिप्त यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो, तो समय की सीमा अर्थहीन हो जाती है। वैश्विक मीडिया ने इसे मिनटों में दशकों की कूटनीति का उदाहरण बताया। यह यात्रा केवल बैठक नहीं थी, बल्कि ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और समृद्धि के नए युग की आधारशिला थी। दोनों नेताओं की बातचीत में स्पष्टता, विश्वास और गति दिखाई दी। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब दुनिया ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, और ऐसे में भारत–यूएई साझेदारी ने स्थिरता और समाधान का मार्ग दिखाया।

ऊर्जा क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक समझौते इस यात्रा की रीढ़ साबित हुए। हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड और एडीएनओसी गैस के बीच दस वर्षीय तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति करार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती दी। वर्ष 2028 से प्रतिवर्ष पांच लाख मीट्रिक टन गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिसकी कुल कीमत लगभग तीन अरब डॉलर आंकी गई है। वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के दौर में यह करार भारत के उद्योग, बिजली उत्पादन और घरेलू उपभोग के लिए सुरक्षा कवच बनेगा। यूएई का भारत का दूसरा सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता बनना इस गहरी रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण है।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में इस यात्रा ने भविष्य की नींव और भी मजबूत की। भारत के शांति कानून के अंतर्गत नागरिक परमाणु सहयोग को नई दिशा मिली। दोनों देशों ने बड़े परमाणु संयंत्रों के साथ-साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर संयुक्त रूप से कार्य करने का निर्णय लिया। यह पहल ऊर्जा उत्पादन को सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी। संयंत्र संचालन, तकनीकी रखरखाव और परमाणु सुरक्षा में गहन सहयोग तय हुआ। यह साझेदारी भारत को स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के वैश्विक प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हुई सहमति ने इस यात्रा को भविष्यवादी स्वरूप प्रदान किया। भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें अंतरिक्ष अवसंरचना, उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सुविधाएं और संयुक्त मिशनों की रूपरेखा तय की गई। इसके साथ ही अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नवाचार केंद्र और व्यावसायीकरण के अवसर विकसित करने पर सहमति बनी। यह साझेदारी अंतरिक्ष को केवल वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का नया माध्यम बनाएगी।

व्यापार और निवेश के मोर्चे पर दोनों नेताओं ने अत्यंत महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए। दोनों नेताओं ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के बाद व्यापार पहले ही ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में यूएई कंपनियों द्वारा हवाई अड्डे, बंदरगाह, रेलवे कनेक्टिविटी, स्मार्ट शहरी टाउनशिप और ऊर्जा अवसंरचना में बड़े निवेश की घोषणा हुई। यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति देगा।

रणनीतिक और रक्षा सहयोग में भी इस यात्रा ने नया अध्याय जोड़ा। दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रक्षा उद्योग, उन्नत तकनीक, संयुक्त प्रशिक्षण और नवाचार को प्राथमिकता दी गई। साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और विशेष अभियानों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च क्षमता संगणना, डिजिटल संरचनाएं और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी संयुक्त पहल की योजना बनी। यह सहयोग केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हुई चर्चा में दोनों नेताओं ने स्पष्ट रूप से सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और शांति, स्थिरता तथा नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह संदेश स्पष्ट था कि भारत और यूएई केवल आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि साझा मूल्यों और जिम्मेदारियों वाले रणनीतिक सहयोगी हैं। पश्चिम एशिया से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र तक, यह साझेदारी स्थिरता का मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगी।

दो-तीन घंटे की यह यात्रा यह सिखाती है कि इतिहास केवल लंबे समय से नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए साहसिक निर्णयों से बनता है। ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु शक्ति, अंतरिक्ष अन्वेषण, व्यापार विस्तार और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में लिए गए फैसले आने वाले दशकों तक प्रभाव डालेंगे। यह मुलाकात दिखाती है कि जब नेतृत्व में स्पष्ट दृष्टि और आपसी विश्वास हो, तो सीमाएं अवसरों में बदल जाती हैं और चुनौतियां संभावनाओं में।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह ऐतिहासिक भेंट भारत–यूएई संबंधों का स्वर्णिम अध्याय बन गई। यह यात्रा केवल कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि भविष्य की रूपरेखा थी। ऊर्जा की रोशनी, परमाणु स्थिरता और अंतरिक्ष की असीम संभावनाओं के साथ यह साझेदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि, सुरक्षा और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करेगी। समय में छोटी, लेकिन प्रभाव में विशाल यह यात्रा इतिहास में सदैव याद रखी जाएगी।

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