सुरेंद्र शर्मा अपने फैंस के दिलों में बस गए हैं : प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी

सुरेंद्र शर्मा ने हमेशा पूरी ईमानदारी और लगन से स्टेज को आगे बढ़ाया : भारत भूषण शर्मा

उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मशहूर रंगकर्मी  सुरेंद्र शर्मा को श्रद्धांजलि

मेरठ । सुरेंद्र शर्मा अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वे अपने फैंस के दिलों में बस गए हैं। वे उर्दू डिपार्टमेंट को गर्व महसूस कराते थे। हमारा दिल उनके लिए बहुत दुखी है। उन पर एक डॉक्यूमेंट्री बननी चाहिए। उनकी याद में एक अच्छा ड्रामा खेला जाना चाहिए। ये शब्द उर्दू प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी के थे, जो यूनाइटेड प्रोग्रेसिव थिएटर एसोसिएशन और उर्दू डिपार्टमेंट के सहयोग से मेरठ के मशहूर रंगकर्मी श्री सुरेंद्र शर्मा की याद में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

उन्होंने आगे कहा कि अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी याद में उनके लिए कुछ करें। हर साल उनके नाम पर एक अवॉर्ड दिया जाना चाहिए। सुरेंद्र शर्मा की याद में सभी को अपना योगदान देना चाहिए। इससे पहले, प्रोग्राम की शुरुआत में सभी ने सुरेंद्र शर्मा पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनकी पत्नी श्रीमती सुशीला शर्मा के समक्ष अपनी शोक-संवेदना व्यक्त की। प्रोग्राम की  अध्यक्षता प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने की और संचालन विनोद कुमार बेचैन ने किया। 

इस मौके पर अपने विचार रखते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं नाट्य निर्देशक भारत भूषण शर्मा ने कहा कि कभी-कभी वक्त ऐसे पल लाता है जिसमें कुछ भी कहना बहुत मुश्किल होता है। सुरेंद्र शर्मा हमें छोड़कर चले गए और अब उनके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल हो रहा है। सुरेंद्र शर्मा ने हमेशा पूरी ईमानदारी और लगन से स्टेज को आगे बढ़ाया। मेरे सभी पॉपुलर और मशहूर नाटकों में सुरेंद्र शर्मा मेरे साथ थे। उन्होंने मेरठ का नाम पूरे भारत में रोशन किया। उनके पॉपुलर नाटकों में मायाराम की माया, रक्त अभिषेक, मादा कैक्टस, अब्दुल्ला दीवाना, बेटी तो वरदान है, दूसरी शादी, एक था गधा और दर्जनों नाटक शामिल हैं। उनके लिए स्टेज सिर्फ एक स्टेज नहीं बल्कि एक इबादत और आईने जैसा था। वह जिस किरदार को निभाते थे, उसकी रूह में उतर जाते थे। उनके किरदार में अनुभव की गहराई थी। हमने एक आर्टिस्ट के साथ-साथ एक रॉक स्टार भी खो दिया है। हम उन्हें अपनी गहरी श्रद्धांजलि देते हैं और प्रार्थना करते हैं कि भगवान उन्हें शांति प्रदान करें। 

अनिल शर्मा ने कहा कि मैंने उनके साथ कई नाटक किए, उन्होंने हमेशा सबकी मदद की। उन्होंने हमेशा कलाकारों का हौसला बढ़ाया और अपने रोल को भी पूरे दिल से निभाया। मैं उन्हें प्यार से देव आनंद कहता था। क्योंकि वह हमेशा हमें देव आनंद के गाने गाकर सुनाते थे। लोधी राजपूत ने कहा कि मैंने उनके साथ बहुत काम किया। मैंने बड़े-बड़े कलाकार देखे हैं लेकिन उनके जैसा रंगकर्मी नहीं देखा। उन्होंने बड़ों के साथ-साथ अपने से छोटे बच्चों को भी बहुत कुछ सिखाया। वह स्टेज पर बेहतरीन डायलॉग बोलने में माहिर थे। वह बहुत हंसमुख, खुशमिजाज और सीधे-सादे इंसान थे। ऐसे लोग बहुत कम देखने को मिलते हैं। 

एसएन वत्स ने कहा कि मैंने सुरेंद्र शर्मा के सभी नाटक देखे हैं और उन्हें करीब पंद्रह साल से जानता हूं। जो भी उनके पास जाता था, हमेशा खुश होकर लौटता था। जो भी उनसे एक बार भी मिलता था, वह उन्हें कभी नहीं भूलता। सीमा समर ने कहा कि मैंने सबसे ज्यादा नाटक उनके साथ किए हैं। उनके जाने से स्टेज को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। ऐसे कलाकार बहुत कम मिलते हैं। उनसे मिलने वाला एक भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि मेरा उनसे कोई झगड़ा हुआ था। या कि वो मुझसे नाराज़ हैं। मुझे अब भी ऐसा नहीं लगता कि वो हमें छोड़कर चले गए हैं। हम उन्हें हमेशा अपने साथ ही पाएंगे। 

जूही त्यागी ने कहा कि सुरेंद्र शर्मा सर हमेशा अपने साथियों के साथ प्यार और स्नेह से पेश आते थे। वो जिस भी उम्र के लोगों के साथ रहते थे, उनके साथ घुलमिल जाते थे। साथ ही, वो एक सोशल वर्कर भी थे और मेरे NGO के साथ मिलकर हमारी मदद करते थे। मोहम्मद राशिद ने कहा कि मैं पिछले पंद्रह सालों से ड्रामा कर रहा हूं और मेरे ज़्यादातर ड्रामा सुरेंद्र शर्मा सर के साथ ही हैं। उनके किरदारों और उनकी कला से हर कोई अच्छी तरह वाकिफ है कि वो किस लेवल के आर्टिस्ट थे। उम्र में बड़े और सीनियर होने के बावजूद उन्होंने कभी जूनियर्स को ये महसूस नहीं होने दिया कि वो सीनियर या बड़े आर्टिस्ट हैं और वो इस फील्ड को अच्छी तरह जानते थे। 

पूर्व मंत्री प्रभु दयाल बाल्मीकि ने कहा कि जब भी मैं किसी प्रोग्राम में जाता हूं, तो मुझे कुछ न कुछ सीखने का मौका मिलता है। मैंने सुरेंद्र शर्मा के कई ड्रामा देखे हैं। वो बहुत अच्छे आर्टिस्ट थे। उनके बात करने का स्टाइल बहुत यूनिक था। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। वो सभी के साथ प्यार और स्नेह से पेश आते थे। आगे भी हर नाटक में वो हमारे साथ महसूस होंगे। इस मौके पर डॉ. अलका वशिष्ठ, अशोक गंभीर, जितेंद्र सी. राज, मुहम्मद राशिद, चौधरी नरेश पाल, अग्नि वर्मा, पंकज आहूजा, माइकल देसावर, हेमंत गोयल, उज्ज्वल, हरीश वर्मा, अवनी वर्मा, सागर शर्मा और सरिता सिंह ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. इरशाद सियानवी, सईद अहमद सहारनपुरी, फरहत अख्तर और बड़ी संख्या में शहर के बुजुर्ग शामिल हुए।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts