कमालपुर में जयपुर की कंपनी तैयार कर रही  220 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट   
                                                                                                                 

मेरठ वालों के लिए खुशखबरी सबसे बड़ी सीवेज समस्या होने वाली है हल

मेरठ। मेरठ वासियों के लिए अच्छी खबर है। बहुप्रतीक्षित 220 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए टेंडर जारी करने की स्वीकृति नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा से मिल गई है। जल निगम ने  जयपुर की कंपनी को इसका टेंडर दिया है। कंपनी ने कार्य आरंभ कर दिया है।  इसका निर्माण कार्य इस साल पूरा होने के आसार नजर आ रहे है। इस एसटीपी के बनने से शहर की सबसे बड़ी सीवेज निस्तारण की समस्या का हल हो जाएगा और काली नदी में नालों का शोधित पानी ही बहेगा।

नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा कार्यक्रम नमामि गंगे  के तहत  विश्व बैंक की मदद से कमालपुर की जमीन पर  यह एसटीपी बनाया जा  रहा है। इसकी कुल लागत लगभग 681.78 करोड़ आएगी। इसमें सिविल कंस्ट्रक्शन पर लगभग 363 करोड़ खर्च होंगे। शेष धनराशि मेंटीनेंस समेत अन्य मदों में खर्च होगी।

एसटीपी से जुड़ेंगे दो बड़े नाले

220 एमएलडी एसटीपी से दो बड़े नालों ओडियन और आबूनाला-दो (बेगमपुल वाला नाला) को जोड़ा जाएगा। इन नालों को टेप कर पानी एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। यहां से शोधित जल ही काली नदी में बहाया जाएगा। इससे काली नदी की कालिमा दूर होगी। साथ ही सीवेज शोधन क्षमता बढ़ने के साथ शहर में सीवर लाइन डालने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

 जल निगम सिविल शाखा के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा ने बताया 220 एमएलडी एसटीपी के निर्माण की अवधि दो साल की रहेगी। यह एसटीपी कमालपुर स्थित 72 एमएलडी एसटीपी के समीप छह हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा  रहा है।  विश्व बैंक की मदद से यह एसटीपी बनाया जा रहा है। इसकी कुल लागत लगभग 681.78 करोड़ आएगी। इसमें सिविल कंस्ट्रक्शन पर लगभग 363 करोड़ खर्च होंगे। शेष धनराशि मेंटीनेंस समेत अन्य मदों में खर्च होगी।  

शोधन की अत्याधुनिक तकनीक पर बनेगा एसटीपी

जल निगम के अधिकारियों के अनुसार 220 एमएलडी एसटीपी का निर्माण एमएलई तकनीक पर किया  जा रहा है  यह तकनीक पूर्व में बनाए गए एसटीपी से बेहतर और अधिक गुणवत्तापरक है। इस तकनीक से शोधित जल का उपयोग पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में किया जा सकेगा। अर्थात शोधित जल काम में लाया जा सकेगा।

 काली नदी से  भूमिगत जल हो रहा प्रदषित 

 काली नदी  में बहने से भूमिगत जल दूषित होने और टीबी, कैंसर, पीलिया, हेपेटाइटिस बी जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में लोगों के आने का हवाला दिया था। जिस क्षेत्र से यह नदी बहन रही है उसके आसपास के लोग टीबी,कैंसर पीलिया आदि बीमारियों के शिकार हो रहे है। 

 एसबीआर तकनीक पर अधारित एसटीपी प्लांट 

मेरठ में 220 एमएलडी क्षमता का एसबीआई तकनीक आधारित एसटीपी निर्माणाधीन है, जो काली (ईस्ट) नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह संयंत्र भविष्य में आधुनिक तकनीक के माध्यम से केवल उपचारित और स्वच्छ जल का ही निस्तारण सुनिश्चित करेगा, जिससे काली (ईस्ट) नदी की निर्मलता और प्रवाह दोनों सुरक्षित रहेंगे।

सौरभ गंगवार नगरायुक्त ,मेरठ


No comments:

Post a Comment

Popular Posts