ख़्वातीन की 'बज़्म' से निकली उम्मीद की किरण 

 महिलाओं के संगठन ने उठाया चैरिटी का जिम्मा 

ठंडे मौसम में गरीब वर्ग को गरमाई का एहसास कराएगी बज़्म

मेरठ। 'क़तार बड़ी लंबी थी कि सुबह से से रात हो गई, ये दो वक्त की रोटी आज फिर मेरा अधूरा ख्वाब हो गई'। आर्थिक पहलुओं से जद्दोजेहद करने वाले इसी कमजोर वर्ग के लिए ठंड के इस बेमुरव्वत मौसम में बज़्म ए ख़्वातीन उम्मीद की किरण बनेगी। 

मेरठ की बज़्म ए ख़्वातीन ने फैसला किया है कि वह सर्दियों के इस मौसम में रात को सड़कों पर निकलकर ठंड से ठिठुरने वाले गरीबों को ढूंढेगी और उन्हें गर्म कपड़े, रजाई, कंबल और खाना मुहैया कराएंगी। बेगम पुल स्थित एक होटल में आयोजित बज़्म की बैठक में ये फैसला लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि हुमायूं नगर स्थित मेरठ पब्लिक गर्ल्स स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने वाली गरीब और  बेसहारा लड़कियों की भी मदद की जाएगी। बज़्म यहां भी छात्राओं को गर्म कपड़ों का वितरण करेगी। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षिका क़मरुन्निसा ज़ैदी ने बताया कि बज़्म नए वर्ष में भी संगठन से जुड़े चैरिटी के कामों को और बढ़ाएगी। इसके अलावा बज़्म  तालीम से जुड़ी अपनी मुहिम को और धार देगी। बैठक की अध्यक्षता दुर्दाना अख्तर और संचालन क़मरुन्निसा ज़ैदी ने किया। बैठक में उस्मानी बेगम, राबिया, अस्मा, सोनिया, सबा, मुबीन, हसीना, फरहा, नगमा, रोशन और खालिदा मुख्य रूप से मौजूद रहीं।

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