बस अड्डा नहीं हुआ खाली, लटका बसपोर्ट का काम
आईएसबीटी व लखनऊ के आलमबाग की तर्ज पर होना है निर्माण
मेरठ। गढ़ रोड स्थित सोहराबगेट बस अड्डे को प्रदेश सरकार पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉड पर बसपोर्ट (एयरपोर्ट की तर्ज पर) बनाने जा रही है। इसके लिए रोडवेज मुख्यालय लखनऊ से टेंडर छोड़ा जा चुका है लेकिन बस अड्डे को खाली करने के लिए रोडवेज की जमीन नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण कार्य आरंभ होने पर देरी हो रही है।
सोहराबगेट अड्डे को पीपीपी मोड में बसपोर्ट में तब्दील किया जाना है। इसका निर्माण आईएसबीटी दिल्ली व लखनऊ के आलमबाग की तर्ज पर होना है । सरकार ने करीब 90 करोड़ रुपये में बसपोर्ट ठेका छोड़ा है।बसपोर्ट पर बसों का संचालन अंडरग्राउंड होगा और ऊपर चार मंजिली बिल्डिंग बनेगी, जिसमें मल्टीप्लेक्स, मॉल, ब्रांडेड शोरूम, रोडवेज कार्यालय, कैंटीन आदि के साथ ही मल्टीलेवल पार्किंग आदि की व्यवस्था होगी। कार्यदायी संस्था जल्द से जल्द जमीन खाली करके देने की मांग कर रही है। राेडवेज नया बस अडडा बनने तक अस्थायी जमीन मांग रहा है। रोडवेज के अधिकारी गांधी आश्रम के पास खाली पड़ी जमीन मांग रहे है। जबकि मेडा के अधिकारी लोहिया नगर में बस अडडे के अस्थायी जमीन देने पर अड़े है। शहर से बाहर होने के कारण यात्री न मिलने पर रोडवेज अधिकारी बस अडडे का खाली नहीं कर पा रहे है।
60 से ज्यादा पेड़ों की हो चुकी है कटाई
बसपोर्ट बनाने वाली कंपनी को बस अड्डा खाली करके देने के लिए सोहराबगेट अड्डा परिसर में खड़े करीब 60 का पेड़ों की कटाई हो चुकी है।
क्या बोले अधिकारी
इसे खाली करने के लिए दूसरी जगह जमीन की तलाश चल रही है जहां से बसों का संचालन किया जा सके। इसके लिए प्रशासन से गांधी आश्रम की जमीन मांगी गई है। मेडा
मेडा द्वारा लोहिया नगर में दी जा रही जमीन बस अड्डे के लिए उपयोगी नहीं है।
संदीप कुमार नायक, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज मेरठ रीजन



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