बीएलओ का फोन चला रहा पति 

15 मिनट बाद प्रशासनिक का बीएलओ हो सका

 मेरठ। शनिवार को तहसील सरधना के ग्राम दुल्हैड़ा के चित्तौड़गढ़ के दर्जनों ग्रामीण एसआईआर फार्म नहीं देने की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा हुए और बीएलओ के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि उनके गांव की बीएलओ ने अभी तक एसआईआर के फार्म नहीं दिए है। जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। 

ग्रामीणों ने बताया कि वह अधिकतर गडरिये/बागडिये लुहार जाति से आते हैं। सरकर द्वारा दी गई पट्टों में ही निवास करते हैं। उन्होंने बताया कि वह 2003 की वोटर लीस्ट में भी वोटर हैं। वह घरेलू उपकरण बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर बेचते हैं और अपना जीवन यापन करते हैं। बीएलओ का नाम अनिता बताया जो उनके गांव में सिर्फ एक बार ही आई थी, उस दौरान वह अपने उपकरण बेचने के लिए क्षेत्र में गए हुए थे। जब वह घर वापस पहुंचे तो बीएलओ के आने की जानकारी मिली। जानकारी मिलते ही सभी बीएलओ के घर पहुंचे और मृतकों, शिफ्ट हुए वोटर की जानकारी दी। जब ग्रामीणों ने बीएलओ से अपने लिए फार्म मांगे तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया। उसके बाद से वह बीएलओ से सम्पर्क करने का काफी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बीएलओं उनसे सम्पर्क नहीं कर रही। बीएलओ के नंबर पर काॅल करते है तो फोन कोई और उठाता है। जिलाधिकारी कार्यालय पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी ने इस बात को सुनो और बीएलओ के नंबर पर तुरंत फोन लगाया तो ये बात सत्य पाई गई। फोन उठाने वाला व्यक्ति बीएलओ का पति निकला। उसने कहा कि ये फोन तो मेरे पास ही रहता है बीएलओ के पास दूसरा नंबर है। प्रशासनिक अधिकारी ने सरकार की योजना का हवाला देते हुए बीएलओ के पति को खूब लताड़ा। करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद बीएलओ महोदया से सम्पर्क हो सका। बीएलओ अनिता ने तहसीलदार के पास होने का हवाला दिया और ग्रमीणों को वहीं भेजने को कहा। तब ग्रामीणों ने बताया कि ज्ञापन देने तो कुछ लोग ही आए हैं लेकिन फार्म तो पूरे गांव के भरे जाने हैं। जिसके बाद तहसीलदार से बात की और बीएलओ को अगले दिन गांव में ही भेजकर फार्म देने को कहा गया। आश्वासन के बाद ग्रामीण वहां से लौट गए।

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