इलमा अज़ीम
इस बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिन के वास्ते स्टेट विज़िट पर आना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। फरवरी, 2022 में यूक्रेन में युद्ध आरंभ होने के बाद से पुतिन का यह पहला आधिकारिक आगमन होगा। पुतिन, पिछली बार यूक्रेन युद्ध से कुछ माह पहले, दिसंबर 2021 में भारत आए थे। रूसी राष्ट्रपति का रेड-कार्पेट वेलकम साउथ ब्लॉक में किया जाएगा, जहां 23वीं सालाना इंडिया-रूस शिखर बैठक होगी।
भारत और रूस के बीच ‘स्पेशल और प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ है, जिसके तहत एसयू-57 फ़ाइटर जेट और मिसाइल डिफ़ेंस शील्ड एस-500 के एडवांस्ड वर्शन की खरीद पर बातचीत होने की उम्मीद है। यह समझौता अमेरिका के साथ किसी भी ट्रेड डील को मुश्किल बना सकता है, जिसने मॉस्को से भारत के हथियारों की खरीद को पीछे धकेल दिया है। ठीक से देखा जाये, तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शक्ति संतुलन सिद्धांत को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाये रखना चाहते हैं, लेकिन ट्रंप का हठयोग इस मार्ग में बाधा पैदा कर रहा है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में खत्म होने वाले चार सालों में रूसी हथियारों की खरीद में काफी गिरावट के बावजूद मास्को भारत का सबसे बड़ा मिलिट्री हार्डवेयर सप्लायर बना हुआ है। हालांकि, रूस-भारत के बीच हुए समझौते को स्टेट ड्यूमा में मंज़ूरी मिलनी बाकी है।
दो दिन की शिखर बैठक में, दोनों पक्ष डिफेंस कोऑपरेशन, न्यूक्लियर एनर्जी, हाइड्रोकार्बन, स्पेस, टेक्नोलॉजी और ट्रेड पर चर्चा करेंगे। साथ ही एस-400 के साज़ो-सामान से सम्बंधित टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भारत को मिल जाना पुतिन की यात्रा को उल्लेखनीय बना देगा। यह भी अहम है कि एसयू-57 फाइटर जेट उड़ाने के लिए इंडियन एयरफ़ोर्स के पायलट तैयार हैं।





No comments:
Post a Comment