वैज्ञानिकों ने पेश किए पेराबैंगनी रोशनी, हाइड्रोजन गैस और अन्य संकेतों को तेज़ी और सटीकता से पहचान वाले सेंसर
मेरठ। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “फोटॉनिक्स एंड इमर्जिंग मैटेरियल्स फ़ॉर फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी (PEMFT-2025)” के दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में हुए सत्रों में देशभर से आए वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों पर विशेष व्याख्यान दिए।
दिनभर चले कार्यक्रमों में स्मार्ट मैटेरियल्स, प्रकाश आधारित तकनीक, सेंसर प्रणाली और नए पदार्थों पर केंद्रित शोध प्रमुख रहे। वक्ताओं ने ऐसे विशेष पदार्थों पर चर्चा की जिनका उपयोग भविष्य में हल्के उपकरण, छोटे रोबोट और ऑप्टिकल डिवाइस बनाने में किया जा सकता है। लेज़र तकनीक के क्षेत्र में सूक्ष्म और तीक्ष्ण प्रकाश बिंदु तैयार करने की जानकारी दी गई, जो चिकित्सा, मशीन निर्माण और तेज़ डेटा संग्रह जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं। टेराहर्ट्ज़ तकनीक से जुड़े व्याख्यानों में उन आधुनिक तरीक़ों पर भी चर्चा हुई जो तेज़ संचार, सुरक्षा जांच और संवेदनशील डिटेक्शन सिस्टम के विकास में सहायक हो सकते हैं।
ऊर्जा और स्वच्छ तकनीकें भी चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं। शोधकर्ताओं ने उन नए पदार्थों और प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला जिनसे कम लागत में हाइड्रोजन उत्पादन, बेहतर सौर ऊर्जा उपकरण और उन्नत बैटरियाँ विकसित की जा सकती हैं। ग्राफीन, एमएक्सीन और अन्य आधुनिक पदार्थों पर हुए अध्ययनों से यह संकेत मिला कि भविष्य में अधिक टिकाऊ और तेज़ चार्ज होने वाली ऊर्जा प्रणालियाँ तैयार की जा सकती हैं। फेरोफ्लुइड जैसे तरल पदार्थ, जिनमें सूक्ष्म चुंबकीय कण होते हैं, मशीनों में घर्षण कम करने और ऊर्जा उत्पादन में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसके साथ ही, चुंबकीय क्षेत्रों के सही उपयोग से हाइड्रोजन उत्पादन को और प्रभावी बनाने की संभावनाएँ भी सामने आईं। पेरोव्स्काइट पदार्थों पर हुए शोध ने जल शोधन, सौर ऊर्जा और औद्योगिक उपयोग में उनके बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।
सेंसर तकनीक से जुड़े सत्रों में भी कई महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए गए। वैज्ञानिकों ने ऐसे सेंसर प्रदर्शित किए जो पराबैंगनी रोशनी, हाइड्रोजन गैस और अन्य संकेतों को तेज़ी और सटीकता से पहचान सकते हैं। गामा किरणों से तैयार पतली परतों वाले गैस सेंसरों ने बेहतर प्रदर्शन दिखाया। मोबाइल फोन से जोड़कर उपयोग किए जाने वाले सेंसर भी प्रस्तुत किए गए, जिनसे माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे प्रदूषकों की पहचान स्थल पर ही की जा सकती है। इसके साथ ही, नैनोस्तर पर पदार्थों की संरचना और गुणों को समझने वाली तकनीकों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। अपशिष्ट गर्मी को बिजली में बदलने वाले दो-आयामी पदार्थों की संभावनाएँ भी आकर्षण का विषय रहीं।
कुल मिलाकर, PEMFT-2025 का दूसरा दिन ज्ञान, शोध और नवाचार से भरपूर रहा। प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि उभरती तकनीकें भविष्य के ऊर्जा, पर्यावरण और तकनीकी विकास के लिए नए अवसर प्रस्तुत कर रही हैं, और आने वाले समय में उन्नत पदार्थ तथा प्रकाश आधारित तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।


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