आवास विकास के वास्तुविद नियोजक निलंबित
मानचित्र के मनमाने तरीके से अप्रुवल देने पर की गयी कार्रवाई
मेरठ के अधिकारियों पर मंडराए खतरे के बादल
मेरठ। आवास एवं विकास परिषद के हाउसिंग कमिश्नर बलकार सिंह ने वास्तुविद नियोजक मुकेश कुमार रूहेला को निलंबित कर दिया है। ये कार्यवाही गाजियाबाद समेत पूरे प्रदेश से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई है। वास्तुविद नियोजक पर मेरठ में भी अवैध तरीके से मानचित्र की अनुमति देने के आरोप हैं। जारी आदेश में मानचित्रों को मनमाने तरीके से अप्रूवल देने पर नाराजगी जताई गई और विभागीय जांच के आदेश दिए गए है। इस कार्यवाही से परिषद के अधिकारियों में भी खलबली है। मेरठ के अधिकारियों को अपनी कुर्सी जाने का खतरा मंडरा गया है।
दरअसल आवास विकास परिषद की योजना संख्या-3 में अवासीय भूखण्ड पर कई अवैध फ्लैटों बनाकर करोड़ों रुपए में बेच दिया। बिल्डर ने खरीदने वालों के नाम बैनामे भी करा दिए और अब अपने नाम से नामांतरण के लिए परिषद में आवेदन कर दिया। जिस भूखण्ड पर ये फ्लैट बने हैं उसे परिषद पहले ही अवैध करार दे चुका था और नियमानुसार इस भवन का नक्शा भी अस्वीकृति की स्थिति में था। ऐसे में फ्लैट खरीदने वालों के साथ भी करोड़ों की धोखाधड़ी होने की बात कही जा रही है।
101 पर अवैध फ्लैटों के निर्माण किया जा रहा था और परिषद ने नोटिस की कार्यवाही की गई थी। जिसके बाद 2013 में सील का आदेश हुआ। उसके बाद परिषद नोटिस नोटिस तो खेलता रहा लेकिन मौके पर अवैध निर्माण नहीं रूका। शमन शुल्क जमा कराया और अवैध फ्लैटों को खत्म कर आवासीय आकार देने हेतु कुछ हिस्से को तोड़ने के लिए शपथ पत्र लिया। वास्तुविक नियोजक की अनुमति में निर्माणकर्ता को अशमनीय भाग को 30 दिन की अवधि में स्वयं हटाना था नहीं तो नक्शा स्वतः निरस्त करने की भी बात कही गई थी, लेकिन निर्माणकर्ता ने नियम को ताक पर रखा और मौके पर अवैध निर्माण के बाद 6 फ्लैट तैयार कर लिए। अब इन फ्लैटों को करोड़ों रूपये में बेचकर बिल्डर मोटी कमाई कर रहा है। अप्रेल 2025 से अब तक कई फ्लैट की रजिस्ट्री भी कराई जा चुकी है। इस मामले में चौंकाने वाली बात ये है कि फ्लैटों को बेचकर बिल्डर अक्टूबर 2025 में उक्त भखण्ड का नामांतरण कराने के लिए परिषद कार्यालय में पहुंच चुका था। यानि भूखण्ड का आवासीय नक्शा तो निरस्त स्थिति में, मौके पर दर्जनों फ्लैट बनाकर तैयार किए। जिन्हें बेचकर अब तक करोड़ो रूपये कमा लिए और अब इस भूखण्ड का नामांतरण कराकर बिल्डर ही मालिक होगा। बता दें कि इस भूखण्ड का क्षेत्रफ्ल 334.49 वर्ग मीटर है। मामला आवास आयुक्त बलकार सिंह के पास पहुंचा उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए वास्तुविद नियोजक को संस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी है।


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